इसरो के उन्नति कार्यक्रम के शुभारंभ के विषय में जानकारी

⚫   हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ के क्षमता निर्माण ।कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो ) ने विकासशील देशों के वैज्ञानिकों , शिक्षाविदों अथवा इंजीनियरों को उपग्रह प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण देने के लिए उन्नति कार्यक्रम शुरू किया ।इस कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 17 देशों के 30 प्रतिभागियों को उपग्रह निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा ।
  
⚫   कार्यक्रम के तहत तीन चरणों में 45 देशों के 90 वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है ।पहले बैच में 17 देशों के 30 इंजीनियरों की टीम भाग ले रही है जिनका प्रशिक्षण यूआर राव उपग्रह केंद्र में शुरू हो गया ।बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग एवं खोज के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की 50 वीं वर्षगांठ ( यूनिस्पेस 50 प्लस ) के अवसर पर विएना में इसरो ने इस कार्यक्रम की घोषणा की थी ।
   
⚫   इस कार्यक्रम का नाम उन्नति ( यूनिस्पेस नैनो सैटेलाइट एसेंबलिंग एंड ट्रेनिंग बाय इसरो ) दिया गया है ।कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष में रुचि रखने वाले सदस्य विकासशील देशों को उपग्रह प्रौद्योगिकी का सैद्धांतिक पाठ पढ़ाया जाएगा साथ |ही उपग्रह फैब्रिकेशन प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ।
     
⚫   नैनो उपग्रहों की डिजाइन तैयार करने , एसेंबलिंग , इंटीग्रेशन और परीक्षण का भी अवसर प्रतिभागियों को मिलेगा ।कुल आठ सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान 10 - 10 के समूह में प्रतिभागियों को बांटकर नैनो उपग्रहों के एसेंबलिंग , इंटीग्रेशन और परीक्षण का मौका दिया जाएगा ।दूसरे बैच का प्रशिक्षण अक्टूबर 2019 और तीसरे बैच का प्रशिक्षण अक्टूबर 2020 में शुरू होगा ।

⚫    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( Indian Space Research Organisation , ISRO ) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है जिसका मुख्यालय बेंगलुरू कर्नाटक में है ।15 अगस्त 1969 में स्थापित , इसरो अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए तत्कालीन इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च की स्थापना ( INCOSPAR ) स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके करीबी सहयोगी और वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई के प्रयासों से 1962 में स्थापित की गयी ।लेकिन बाद में 1969 में इसका स्थान इसरो ने ले लिया ।संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है ।अन्तरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों , प्रमोचक यानों , परिज्ञापी राकेटों और भू - प्रणालियों का ।विकास शामिल हैं ।

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