नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।इसका उल्लेख अनुच्छेद 148 में किया गया है।सार्वजनिक धन का संरक्षक भी कहा जाता है।नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे सकता है। नियंत्रक महालेखा परीक्षक संसद के दोनों सदनों के समा वेदन पर हटाया जा सकता है नियंत्रक महालेखा परीक्षक और उसके कर्मचारियों का वेतन संचित निधि पर भारित होते हैं संघ और राज्य दोनों स्तरों के समस्त वित्तीय प्रणाली का नियंत्रण नियंत्रक महालेखा परीक्षक करता है

CAG के कार्य-- भारत और प्रत्येक राज्य एवं संघ शासित क्षेत्र की संचित निधि से व्यय की संपरीक्षा।

संघ और राज्यों के आकस्मिक निधि एवं लोक लेखा  से व्यय की संपरीक्षा।

नियंत्रक महालेखा परीक्षक लोक लेखा समिति के प्रतिवेदन की परीक्षा करता है

यह देखना है कि संसद द्वारा दी गई राशि का व्यय विधि के अनुसार हुआ है ।

 सीएजी, राष्ट्रपति या किसी भी राज्य के राज्यपाल द्वारा आवेदित किसी भी प्राधिकरण के व्यय, लेनदेन का ऑडिट कर सकता है।

 सीएजी, राष्ट्रपति को उन फार्म के बारे में सलाह देता है जो संघ और राज्यों के खातों में रखे जाते हैं।

 सीएजी, राष्ट्रपति को संघ के खातों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात् राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के पास भेजतें हैं।

 सीएजी राज्य के खातों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधायिका को देते हैं।

 वह किसी भी कर या शुल्क की शुद्ध आय की जांच और उसे प्रमाणित करता है।

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