सम्राट अशोक (272 से 232 ईसा पूर्व)

 मौर्य वंश का सबसे महान शासक सम्राट अशोक था। इसके पिता का नाम बिंदुसार तथा माता का नाम धम्मा या सुभद्रांगी था ।
शासक बनने के पूर्व अशोक क्रमशः तक्षशिला एवं उज्जैन का गवर्नर था। उसकी कई पत्नियां थी उसमें से कारूवाकि का उल्लेख उसके कौशांबी के स्तंभलेख में हुआ है इसलिए उसे रानी का अभिलेख भी कहा जाता है। अशोक ने अपने शासनकाल के 8 वें वर्ष अर्थात् 261 ईसा पूर्व में कलिंग का युद्ध किया था ।यह युद्ध अशोक ने क्यों किया और उस समय वहां का शासक कौन था इस संबंध में अशोक का अभिलेख मौन है। लेकिन कलिंग पर नियंत्रण स्थापित होने से जल तथा स्थल दोनों मार्ग से दक्षिण भारत से जुड़ा जा सकता था ।
कलिंग के शासक खारवेल का हाथीगुंफा अभिलेख के अनुसार उस समय कलिंग का शासक नंदराज था ।
कलिंग युद्ध की विभीषिका को देखकर अशोक का मन द्रवित हो उठा और उसने इस युद्ध के लगभग 1.5 वर्ष के बाद बौद्ध धर्म को अपना लिया। कल्हण की राज तरंगिणी के अनुसार बौद्ध धर्म को अपनाने से पूर्व अशोक बौद्ध धर्म का उपासक था। उसे बौद्ध धर्म में दीक्षित करने का श्रेय बौद्ध विद्वान उपगुप्त को जाता है ।
अशोक ने बौद्ध धर्म के विकास हेतु कई कार्य किए उसी के शासनकाल में तीसरी बौद्ध संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र में किया गया। इस तीसरी संगीत के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार हेतु विभिन्न प्रचारक दलों को भी विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जिसमें से श्रीलंका में उसने महेंद्र व संघमित्रा को भेजा था। अशोक ने एक सर्वथा नीति धम्म नीति का प्रतिपादन किया जो कि नैतिक मूल्यों का दस्तावेज था न कि बौद्ध धर्म ।
अशोक के समकालीन श्रीलंकाई शासक उसकी धम्म नीति से इतना अधिक प्रभावित था कि उसने भी इसके समान ही "प्रियदर्शी" की उपाधि धारण की। अशोक एक महान निर्माता शासक भी था उसने नेपाल में ललितपाटन और कश्मीर में वितस्ता झेलम नदी के किनारे श्रीनगर नामक दो नया शहर की स्थापना की। नेपाल में पुत्री चारुमति के द्वारा अपने पति देवपाल के नाम पर देवपाटन नामक एक ने शहर की स्थापना की गई। अशोक की मृत्यु के बाद उसका उत्तराधिकारी कौन बना यह एक विवाद का विषय माना जाता है परंतु यह निर्विवाद रुप से कहा जा सकता है कि इस वंश का अंतिम शासक था जिसकी हत्या 150 ईसा पूर्व में एक ब्राम्हण मौर्य सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी थी और मौर्य वंश के स्थान पर एक नए वंश की स्थापना की।
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