ईरानियों के बाद भारत पर विदेशों में यूनानीयों का आक्रमण हुआ। यह आक्रमण सिकंदर के नेतृत्व में हुआ। सिकंदर मेसिडोनिया के शासक छत्रप फिलिप द्वितीय का पुत्र था। सिकंदर के आक्रमण के समय पश्चिमोत्तर भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था ।उनमें कुछ गणतंत्रात्मक कुछ राजतंत्रात्मक राज्य थे। भारत की विजय अभियान के अंतर्गत सिकंदर ने 326 ईसा पूर्व बल्ख को जीतने के बाद काबुल होते हुए हिंदूकुश पर्वत को पार किया। निकैया, जो भारत का सबसे निकटवर्ती प्रदेश था में तक्षशिला के राजा आंभी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल सिकंदर को मिला और पूर्ण सहयोग का वचन दिया। किसी भारतीय द्वारा अपने देश के प्रति विश्वासघात किये जाने का इतिहास में पहला उदाहरण है ।भारत की धरती पर सिकंदर का प्रबल विरोध राजा पोरस ने किया । वितस्ता या झेलम नदी के किनारे पोरस और सिकंदर के बीच युद्ध हुआ । जिसमें पोरस पराजित हो गया परंतु पोरस की बहादुरी से प्रभावित होगा सिकंदर ने उसके राज्य को वापस कर दिया। इस युद्ध को हाइडेस्पीज या झेलम का युद्ध कहा जाता है। सिकंदर के आक्रमण के समय भारत का शासक धनानंद था। इसके बाद सिकंदर जब व्यास नदी पर पहुंचा तो उसके सैनिकों ने और आगे बढ़ने से इंकार कर दिया तब सिकंदर अपने विजित छेत्र सेनापति फिलिप को सौंप कर वापस लौट गया। इससे घनानंद को सिकंदर के आक्रमण का सामना नहीं करना पड़ा। सिकंदर 19 माह तक भारत में रहा। 323 ईसा पूर्व में बेबीलोन में सिकंदर का निधन हो गया।