सातवाहन वंश

मौर्योत्तर काल में दक्कन के क्षेत्र में जिस वंश का शासन था वह सातवाहन वंश था ।
इस वंश का संस्थापक सिमुक था परंतु इस वंश का प्रथम महत्वपूर्ण शासक सातकर्णी प्रथम था। सातवाहन शासकों की राजधानी प्रतिष्ठान या पैठान थी जो कि महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के किनारे स्थित थी।सातकर्णी प्रथम की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी नायनिका ने अपने दो अल्प वयस्क पुत्र की संरक्षिका के रूप में शासन करना प्रारंभ कर दिया ।
इसकी मृत्यु के बाद सातवाहनों का इतिहास अंधकार पूर्ण हो जाता है ।
परंतु इस अंधकार युग में भी एक शांतिप्रिय सातवाहन शासक हाल के बारे में जानकारी मिलती है। हाल एक विद्वान शासक था ।उसने प्राकृत भाषा में एक पुस्तक गाथा सप्तशती की रचना की। इसके दरबार में कई विद्वान निवास करते थे जैसे कि सर्ववर्मन और गुणाडय।
सातवाहन वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि था।इसके काल में सातवाहनों का इतिहास अंधकार युग समाप्त हो गया।इसलिए इसे सातवाहन वंश का पुनरुद्धारक भी कहा जाता है।
 सातवाहनों की राजकीय भाषा प्राकृत थी। सातवाहन समाज मातृसत्तात्मक समाज था ।सातवाहनों ने सीसे व पोटीन के सिक्के चलाए। शीशे के सिक्के सर्वप्रथम सात वाहनों ने ही चलाया था।  सात वाहनों के शासनकाल में ही मूर्ति निर्माण की अमरावती कला शैली का विकास हुआ। अमरावती स्तूप का निर्माण भी सात वाहनों के काल में हुआ था। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसका सफेद संगमरमर से निर्मित होना था।
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