भारत सरकार अधिनियम 1935 पार्ट 4

भारत शासन अधिनियम , 1935 के अधीन  फरवरी , 1937 में 11 प्रान्तों में प्रान्तीय विधान मण्डलों के चुनाव कराये गये । चुनाव में कांग्रेस को भारी सफलता प्राप्त हुई और उसने 6 प्रान्तों  ( मद्रास , बिहार , उड़ीसा , मध्य प्रान्त , संयुक्त प्रान्त और मुम्बई ) में अपनी सरकार बनायी । पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त एवं असम में भी कांग्रेस ने किया मिली - जुली सरकार बनायी । कुल तीन प्रान्तों इल की ( पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त , असम तथा सिन्ध ) में  एक मिली जुली सरकार गठित की गयी थी । पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी तथा बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी की सरकार का गठित हुई थी ।

1937 में संपन्न प्रांतीय विधान सभा चुनाव एवं ' में उत्तर प्रदेश ( संयुक्त प्रांत ) के कुल 228 में से 134 स्थानों पर कांग्रेस को सफलता मिली थी । संयुक्त प्रांत में कांग्रेस ने अकेले सरकार बनाई ।  इस सरकार में मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत एवं विधि तथा न्याय मंत्री के0एन0 काटजू थे ।  जबकि वित्त मंत्रालय रफी अहमद किदवई को दिया गया था ।

लगभग 28 माह तक शासन में रहने के बाद अक्टूबर 1939 में कांग्रेस मंत्रिमण्डल ने 8 प्रान्तों में निम्न दो कारणों से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया ( i ) बिना कांग्रेस की सहमति के भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल किया गया था , तथा ( ii ) कांग्रेस के युद्ध के उद्देश्य की घोषणा तथा युद्धोपरान्त भारत की स्वतन्त्रता की माँग की उपेक्षा की गयी थी । ध्यातव्य है कि कांग्रेस मंत्रिमण्डल द्वारा त्यागपत्र दिये जाने के पश्चात मुश्लिम लीग ने 22 दिसम्बर 1939 को ‘ मुक्ति दिवस ' के रूप में मनाया । इसमें उसका साथ डा . अम्बेडकर ने भी दिया था । । कांग्रेस मंत्रिमण्डल के त्यागपत्र से उत्पन्न संवैधानिक संकट तथा युद्ध में भारत के सहयोग की आवश्यकतावश ब्रिटिश सरकार ने लार्ड लिनलिथगो ( वायसराय ) के माध्यम से 8 अगस्त 1940 को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिसे अगस्त प्रस्ताव ' कहा जाता है । इसमें कहा गया कि भारत का संविधान बनाना भारतीयों का अपना अधिकार है , और युद्ध की समाप्ति पर भारत में औपनिवेशिक स्वराज स्थापित किया जायेगा । कांग्रेस तथा मुश्लिम लीग दोनों ने इस पर असंतोष व्यक्त किया ।

कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव के विरोध तथा युद्ध से अपने को अलग साबित करने के लिए ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह ' आरम्भ किया । इस विचारधारा के पोषक गाँधी जी थे । व्यक्तिगत सत्याग्रह 17 अक्टूबर 1940 को पवनार आश्रम ( महाराष्ट्र ) से शुरू किया गया । इसके प्रथम सत्याग्रही आचार्य विनोवा भावे तथा दूसरे सत्याग्रही जवाहर लाल नेहरु थे। इस आन्दोलन को दिल्ली चलो ' आन्दोलन भी कहा जाता हैं ।

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