भारत की स्थिति भूमध्य रेखा के उत्तर में है और कर्क रेखा देश के मध्य से गुजरती है कर्क रेखा देश को दो भागों में विभाजित कर देती है। इस प्रकार भारत का उत्तरी भाग उपोषण कटिबंध तथा दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में स्थित है । भारत में उत्तर की ओर हिमालय पर्वत श्रेणी तथा दक्षिण पूर्वी एवं दक्षिण पश्चिमी दिशा में हिंद महासागर स्थित है, जिन्होंने इस की जलवायु को बहुत प्रभावित किया है इसी कारण भारत में विविध प्रकार की जलवायु पाई जाती हैं । वस्तुतः भारत की जलवायु पूर्णता मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। जिन भागों में मानसून के मार्ग में कोई अवरोध उपस्थित होता है उन क्षेत्रों में वर्षा अधिक होती है।
*जैसे पश्चिमी घाट तथा हिमालय पर्वत के दक्षिण ढालों पर।
* एक स्थान से दूसरे स्थान और एक ऋतु से दूसरी जो तूने तापमान एवं वर्षण में पर्याप्त अंतर पाया जाता है ।ग्रीष्म ऋतु में भारत के पश्चिम में स्थित थार मरुस्थल में इतनी प्रचंड गर्मी पड़ती है, कि तापमान पर आया 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है जबकि शीत ऋतु में कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र के लेह नगर में इतनी कड़ाके की ठंड पड़ती है, कि तापमान जमाव बिंदु से 45 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है अर्थात -45 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।
* केरल और अंडमान निकोबार दीप समूह में दिन और रात के तापमान में 7 या 8 डिग्री सेल्सियस का अंतर पाया जाता है इसके विपरीत थार मरुस्थल में यदि दिन का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस रहता है तो रात में यह जमाव बिंदु 0 तक पहुंच सकता है जब हिमालय पर्वती क्षेत्र में हिमपात होता है तब शेष भारत में वर्षा की बौछारें पढ़ते हैं कुछ विदेशी विद्वानों ने भारत को अनेक जलवायु वाला देश बताया है।