चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य (380-414 ईस्वी)

चंद्रगुप्त द्वितीय गुप्त वंश का महान शासक था इसके काल में गुप्त साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया ।उसने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की ।उसने शकों को निर्णायक रूप से पराजित किया और इस उपलक्ष्य में उसने शकों की शैली में चांदी के सिक्के जारी किया। यह गुप्त वंश का पहला शासक था जिसने चांदी के सिक्के जारी किए। उस की प्रथम राजधानी पाटलिपुत्र जबकि दूसरी राजधानी उज्जैन थी।
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य कला और साहित्य का अनुरागी शासक था। इस के दरबार में संस्कृत साहित्य के 9 प्रसिद्ध विद्वान निवास करते थे जिन्हें सम्मिलित रूप से नवरत्न कहा जाता है।उनमे से धनवंतरी चंद्रगुप्त के दरबार में रहने वाला एक प्रसिद्ध चिकित्सक था। उसे भारतीय आयुर्वेद का भगवान कहा जाता है। वराह मिहिर ने वृहत्संहिता नामक खगोल शास्त्र पर एक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की। इसी के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था वह भारत में 399 ईस्वी से 414 ईस्वी तक रुका ।
उसने भारत से प्राप्त अपने अनुभवों को एक प्रसिद्ध पुस्तक फु-को-की में संकलित किया ।उसने कहा कि भारत के लोग आम वस्तुओं के लेन-देन में कौड़ी का प्रयोग करते हैं ।चंद्रगुप्त मौर्य के पाटलिपुत्र स्थित राज्यप्रासाद का भी दर्शन किया। इसके बारे में उसने कहा था कि उसके राजप्रासाद को देखने के बाद ऐसा लगा मानो उसका निर्माण किसी देवदूत के द्वारा कराया गया हो।
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