सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय के गठन का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 124 में है । भारत में उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ था  सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य  न्यायाधीश होते हैं तथा 30 अन्य न्यायाधीश होते हैं। संसद समय-समय पर न्यायाधीशों की संख्या का निर्धारण कर सकती है ।सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है । उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय भारत के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश से विचार विमर्श करना पड़ता है। इसमें मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य चार वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से पूर्व राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है । सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए निम्नलिखित होनी चाहिए

-वह भारत का नागरिक हो।

-वह किसी उच्च न्यायालय में या दो या दो से अधिक उच्च न्यायालय में न्यूनतम 5 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो।

-किसी एक या अधिक उच्च न्यायालय में न्यूनतम 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।

-राष्ट्रपति की राय में पारंगत विधि वेत्ता हो।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का कार्यकाल 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक होता है। सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देता है ।सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद के दोनों सदन अपने कुल बहुमत से जो कि उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से कम ना हो एक प्रस्ताव पारित करना पड़ेगा ।उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने के पश्चात किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकते हैं । सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्ते संचित निधि पर भारित होते हैं । उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन का निर्धारण संसद द्वारा बनाए गए विधि के अंतर्गत किया जाता है ।सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वर्तमान में ₹100000 मासिक वेतन मिलता है तथा अन्य न्यायाधीशों को ₹90000 मासिक वेतन मिलता है ।भारत का सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में है।

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