बादामी के चालुक्य वंश का संस्थापक जयसिंह था जबकि प्रथम शक्तिशाली शासक पुलकेशिन प्रथम था ।
इसका सर्वाधिक शक्तिशाली शासक पुलकेशिन द्वितीय था
इसकी राजधानी वातापी कर्नाटक थी वातापी के चालुक्य कर्नाटक वासी थे और इनकी भाषा कन्नड़ थी।
इस शक्तिशाली शासक की उपलब्धियों की जानकारी उसके मूल प्रसस्ति से मिलती है जो कि बीजापुर जिले के कर्नाटक राज्य में स्थित है।
इस शक्तिशाली शासक ऐहोल प्रशस्ति की रचना पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रवि कीर्ति के द्वारा की गई थी।
रवि कीर्ति जैन धर्म को मानने वाला था इसी ने एहोल में मेगुती के जैन मंदिर का निर्माण कराया था ।
पुलकेशिन द्वितीय ने उत्तर भारत के अत्यंत शक्तिशाली शासक हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर पराजित किया। पुलकेशिन द्वितीय ने ईरान या फारस के शासक खुसरो द्वितीय के साथ मित्रता की।
वातापी के चालुक्य में सबसे अधिक समय तक राज्य करने वाला शासक विजयादित्य था उसने कुल 37 वर्षों तक शासन किया ।उसी ने पत्तदकल में शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। चालूक्यों ने मंदिर निर्माण की बेशर शैली को जन्म दिया। इसलिए शैली को चालुक्य शैली भी कहा जाता है। यह बेसर शैली द्रविड़ और नागर कला सैली का मिश्रित रूप था ।शैली के मंदिरों के उदाहरण एहोल तथा बादामी मिलते हैं। यह सभी कर्नाटक राज्य में स्थित है।एहोल को तो मंदिरों का शहर भी कहा जाता है यहां कुल 70 मंदिरों के साक्ष्य मिलते हैं।