सौर मंडल के महत्वपूर्ण तथ्य (part 4)

1. क्षुद्रग्रह :-
ये छोटी वस्तुएं होती हैं; चट्टानें (ज्यादातर अवशेष) सूर्य के चारों ओर घूर्णन करते रहते हैं।
ये मुख्यतः क्षुद्रग्रह पट्टी में पाए जाते हैं जो मंगल एवं बृहस्पति के कक्षों के बीच में स्थित होते हैं।
इन्हें छोटे ग्रह भी कहा जाता है।
सेरेस, वेस्‍टा, साइक सौर मंडल में कुछ प्रसिद्ध एवं सबसे बड़े क्षुद्रग्रह हैं।

2. उल्का एवं उल्कापिंड :-
इन्हें उल्‍का (शूटिंग स्‍टार) भी कहा जाता है।
उल्काएं छोटे आकार की चट्टानी सामग्री होती है जो सामान्यतः क्षुद्रग्रह के टकराव से बनती है एवं पृथ्वी पर पहुँचती है।
पृथ्वी की वायुमंडलीय परतों के कारण, ये छोटी चट्टानें सतह तक पहुंचने से पहले जल जाती हैं।
लेकिन कुछ ऐसी उल्काएं भी हैं जो पूर्ण रूप से नहीं जलती हैं और पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाती हैं। उन्हें उल्कापिंड कहा जाता है।
विलियामेट, मबोजी, केप यॉर्क एवं एल चाको (Willamette, Mbozi, Cape York, एवं El Chaco)पृथ्वी पर पाए जाने वाले कुछ उल्कापिंड हैं।
यह माना जाता है कि भारत में लोणार झील, महाराष्ट्र प्लीस्टोसीन युग में एक उल्का प्रभाव के कारण ही निर्मित हुई है।

3. धूमकेतु :-
ये चमकदार, प्रकाशमान “पुच्छल तारे (Tailed Stars)” होते हैं। ये चट्टानी एवं धात्विक सामग्री  होती है जो जमी हुई गैसों (frozen gases) से घिरी होती है।
ये सामान्यतः कुइपर सीमा (Kuiper Belt) में पाए जाते हैं। ये सूर्य की ओर यात्रा करते हैं।
इनका अंतिम भाग (पूंछ) सूर्य के विपरीत होता है एवं अगला भाग सूर्य की ओर होता है।
जब वे सूर्य के नजदीक यात्रा करते हैं तब वे साफ़ दिखाई देते हैं।
हैली धूमकेतु प्रसिद्ध है जो आखिरी बार वर्ष 1986 में प्रकट हुआ था और यह प्रत्येक 76 वर्षों में पुन: प्रकट होता है।
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