तरंग की विशेषताएं:
परावर्तन (Reflection) -तरंगों का किसी सतह से टकराकर पुनः उसी माध्यम से वापस होना। यह ध्वनि एवं प्रकाश दोनों तरंगों की विशेषता होती है।
अपवर्तन (Refraction) - यह तरंग की वह विशेषता है, जिसके कारण तरंगें एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर अपने मूल पथ से विचलित हो जाती हैं। सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर वे अभिलम्ब से दूर हट जाती हैं, जबकि विरल से सघन माध्यम में जाने पर अभिलम्ब की ओर मुड़ जाती हैं। यह भी दोनों प्रकार की तरंगों में पाया जाता है।
विवर्तन (Diffraction) -यह तरंग की वह विशेषता है जिसमें किसी बाधा के किनारों पर मुड़ जाती हैं। यह भी अनुप्रस्थ एवं अनुदैध्र्य दोनों प्रकार की तरंगों में पाया जाता है।
व्यतिकरण (Interference) : यदि दो समान आवृत्ति वाली तरंगों को एक ही दिशा में समान वेग से गतिशील हो तो किसी बिन्दु पर इनकी तीव्रता महत्तम तथा किसी बिन्दु पर न्यूनतम होती है। तरंग की इस विशेषता को व्यतिकरण कहते हैं। जिस बिन्दु पर महत्तम तीव्रता पैदा होती है उसे संपोषी व्यतिकरण तथा जिस बिन्दु पर न्यूनतम तीव्रता होती है उसे विनाशी व्यतिकरण कहते है। यह भी दोनों प्रकार की तरंगों की विशेषता है।
ध्रवण (Polarization)- यह तरंग की वह विशेषता है, जिसमें तरंग के कम्पन तरंग की गति के लम्बवत् तल में केवल एक ही दिशा में होता है। धु्रवण केवल अनुप्रस्थ तरंग की विशेषता है। प्रकाश को अनुप्रस्थ तरंग सिद्ध करने के लिए उसका धु्रवित होना ठोस प्रमाण है।