उत्प्लावक बल (Buoyant force) एवं आर्किमिडीज का सिद्धांत

उत्प्लावक बल (Buoyant force)  एवं आर्किमिडीज का सिद्धांत

      जब कोई ठोस वस्तु द्रव में डुबाई जाती है। तो द्रव वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाया जाता है जिसे उत्प्लावन बल कहते हैं। इससे वस्तु के भार में आभासी कमी होती है।

      इस बल का मान वस्तु द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होता है।

      यह बल हटाये गये द्रव के गुरूत्व केन्द्र पर कार्य करता है, जिसे उत्प्लावन केन्द्र कहा जाता है।

आर्किमिडीज का सिद्धांत (Principle of Archimedes) : किसी वस्तु को द्रव में आंशिक या पूर्णतः डुबोने पर उसके भार में आयी आभासी कमी उसके द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होती है।

      उत्प्लावन केन्द्र (Centre of Boyancy) से जाने वाली ऊध्र्व रेखा जिस बिन्दू पर वस्तु के गुरुत्व केन्द्र कहते है।

      तैरने वाली वस्तु के स्थायी संतुलन के लिए मित-केन्द्र का गुरूत्व केन्द्र के ऊपर रहना चाहिए।

      घनत्व (Density: इकाई आयतन के द्रव्यमान को घनत्व कहते हैं। इसका S.I. मात्रक किलोग्राम/मीटर3 होता है।

      वर्फ का घनत्व जल की अपेक्षा कम होता है, इसलिए वह पानी पर तैरता है।

      समुद्री जल का घनत्व साधारण जल की अपेक्षा अधिक होने के कारण वहाँ तैरना आसान होता है।

      जब वर्फ पानी पर तैरता है तो उस समय उसके आयतन का 1/10 भाग पानी के ऊपर तथा 9/10 भाग पानी के अन्दर रहता है। शुद्ध जल का घनत्व 1 किग्रा0/मी03 होता है। 

      आपेक्षिक घनत्व (Relative Density) : यह वस्तु का घनत्व तथा 40C पर जल के घनत्व का अनुपात होता है। आपेक्षिक घनत्व = वस्तु का घनत्व/ 40C पर जल का घनत्व।

      आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नही होता है।

      तरल के आपेक्षिक घनत्व का मापन हाइड्रोमीटर (Hydrometre) के द्वारा किया जाता है।

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