सागर में महासागरों की सत्ता पर जल के एक निश्चित दिशा में प्रवाहित होने की गति को धारा कहते हैं। जब पवन वेग से प्रेरित होकर सागरी सतह का जल मंद गति से परिसंचालित होता है ,तो उसे प्रवाह कहते हैं जैसे - दक्षिणी एवं उत्तरी अटलांटिक प्रवाह । समुद्र का जल जब एक निश्चित दिशा में अपेक्षाकृत अधिक वेग से अग्रसर होता है, तो उसे धारा कहते हैं । इसका वेग 28 से 42 किलोमीटर प्रति घंटा होता है ,जैसे एल- नीनो धारा । एल नीनो पेरू के पश्चिमी तट से 200 किलोमीटर दूरी पर उत्तर से दक्षिण दिशा में चलने वाली एक गर्म जलधारा है । ला- नीनो एक विपरीत महासागरीय धारा है इसका प्रभाव तब होता है जब एल -नीनो का प्रभाव खत्म हो जाता है । ला-नीनो ,एल -नीनो की विपरीत स्थिति है अर्थात ला-नीनो साधारण स्थिति है ।एल-नीनो मडोसकी मध्य प्रशांत महासागर में उत्पन्न होती है। इसे डेटलाइन एल नीनो भी कहते हैं। यह जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होता है। समुद्र का जल जब अधिक गति से एक सुनिश्चित दिशा में पृष्ठभूमि नदियों के बाद भी गतिशील होता है , तो उसे विशाल धारा कहते हैं जैसे- गल्फ स्ट्रीम।
महासागरीय धाराओं के प्रकार
1-गर्म धारा
विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर प्रवाहित होने वाली धाराएं गर्म धाराएं गर्म धरााये होती हैं जैसे- ब्राजील धारा
2-ठण्डी धारा
ध्रुव से विश्वत रेखा की ओर बहने वाली धारा ठंडी होती है जैसे लैब्राडोर धारा।