जीव विज्ञान - जीवधारियों का वर्गीकरण : जीवधारियों की द्वि-जगत वर्गीकरण प्रणाली - 02

क्रमशः....

ई. एच. हीकल नामक एक जर्मन वैज्ञानिक ने सन् 1866 में सुझाव दिया कि उन एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को, जो स्पष्ट रूप से जन्तु अथवा वनस्पति की श्रेणी में नहीं आते, के समुचित समायोजन के लिए एक तीसरे जगत, प्रोटिस्ट का प्रावधान किया जार्। जीवाणु, शिवाल, कवक तथा प्रोटोजोआ को प्रोटिस्टा में सम्मिलित किया गया।

 प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटी प्रोटिस्ट – वर्तमान शताब्दी के पांचवें दशक में, इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा कोशिकाओं की सूक्ष्म आन्तरिक संरचना का अध्ययन करने पर इस बात का ज्ञान हुआ कि जीवाणुओं में, केन्द्रक-द्रव्य के चारों ओर केन्द्र आवरण नहीं होता। इस प्रकार के जीव प्रोकैरियोट कहलाए। इसके विपरीत, अनेक जीवधारियों की कोशिकाओं में केन्द्रक-द्रव्य पर केन्द्रक कला का आवरण विद्यमान होता है, ऐसे जीवधारी यूकैरियोट  कहलाए। इस लक्षण के आधार पर प्रोटिस्टों को दो समूहों – यूकैरियोटी उच्चतर प्रोटिस्ट तथा प्रोकैरियोटी निम्नतर प्रोटिस्ट  - में वर्गीकृत किय गया। कुछ समय पश्चात् ज्ञात हुआ कि प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी जीवों में अनेक अन्य अन्तर भी हैं। (वर्गीकरण की इस प्रणाली में विषाणुओं का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इन्हें कोशिका ही नही माना जा सकता)।

अभी हम चलते रहेंगे 'जीवधारियों का वर्गीकरण" पे चर्चा के साथ ही .......

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