तमिल फिल्म रोबोट जब हिंदी में प्रदर्शित हुई तो आम हिंदी दर्शकों ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इससे पहले इसी तरह की अंग्रेजी में टर्मिनेटर और ट्रांसकेंडेंस फिल्में बन चुकी हैl इन फिल्मों के आने से पहले तक रोबोट को आज्ञाकारी गुलाम की दृष्टि से देखा जा रहा थाl लेकिन हाल ही में जर्मनी के कार कारखाने में एक व्यक्ति के कुचले जाने और गुड़गांव के निकट मानेसर में भी रोबोट से एक मजदूर के मारे जाने के बाद से यह चर्चा का विषय होना तय था कि क्या रोबोट हमारी जिंदगी के लिए उपयोगी है या वो शासक की भूमिका निभाने के लिए तैयार बैठा है और हम उसकी गुलामी या फिर उसके हम गुलाम बने जा रहे हैंl
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर स्टुअर्ट आर्मस्ट्रांग का कहना है कि भविष्य में बुद्धिमान रोबोट ना सिर्फ मनुष्यों से ज्यादा तेज और चालाक होंगे बल्कि वे देशों के शासन चलाने और हमारा पूरी तरह से सफाया करने में भी सक्षम होंगेl यदि हमने कृत्रिम बुद्धि पर चल रहे अनुसंधान में सावधानियां नहीं बरती तो हमें लेने के देने पड़ जाएंगेl डाक्टर आर्मस्ट्रांग का मानना है कि कृत्रिम बुद्धि चालित मशीनें जिस रफ्तार से काम करेंगे उसका मुकाबला मानव मस्तिष्क नहीं कर सकेगाl यह मशीनें इतने शक्तिशाली हो जाएंगे कि वह मनुष्यों के साथ अपने संवाद को दरकिनार करके अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, स्वास्थ्य और परिवहन सेवाओं को अपने नियंत्रण में ले लेंगेl भविष्य के रोबोट आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस होंगे इस वजह से वे सौपे गए सीमित और विशिष्ट कार्यों के अलावा दूसरे कार्य करने में भी सक्षम होंगेl