ध्वनि -1

ध्वनि

      ध्वनि एक अनुदैध्र्य तरंग है, जो हमारे कानों में संवेदन उत्पन्न करता है।

      न्यूटन के अनुसार, ध्वनि का वेग माध्यम की प्रत्यास्थता (Elasticity) एवं उसके घनत्व पर निर्भर करता है। यदि ध्वनि का वेग (V)] घनत्व (d) तथा माध्यम की प्रत्यास्थता (E) की प्रत्यास्थता (E)  हो तो V= e/d  

      वायु में 10C ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल 0.6 मी0/से0 बढ़ता है।

      ध्वनि का वेग सबसे अधिक ठोस में, फिर द्रव में तथा सबसे कम गैस में होता है। कुछ माध्यमों का वेग निम्नलिखित है-

माध्यम

ध्वनि का वेग

शुष्क वायु

331 m/s

शुष्क वायु (200C)

343 m/s

हाइड्रोजन

1269 m/s

आसुत जल

1498 m/s

लकड़ी

3700 m/s

लोहा

5130 m/s

पाइरक्स काँच

5170 m/s

एल्युमिनियम

6420 m/s

      परावर्तन (Reflection) यह ध्वनि की वह विशेषता है, जिसके कारण वह किसी परावर्तक सतह से टकराने के बाद उसी माध्यम से वापस हो जाती है।

      प्रतिध्वनि (Echo) प्रतिध्वनि एक परावर्तित ध्वनि है, जिसे स्पष्ट सुना जा सकता है। प्रतिध्वनि सुनने के लिए 200C तापमान पर स्रोता (Listener) एवं परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी लगभग 17.2 मीटर होनी चाहिए। यदि दो ध्वनियों में समय का अन्तराल 1/10 सेकेण्ड से कम हो तो हमारा कान इस ध्वनि को नहीं सुन पाता है।

-शेष अगले भाग में

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