राष्ट्रपति के अतिरिक्त, भारत में एक उपराष्ट्रपति भी होता है। उसके निर्वाचन की प्रक्रिया राष्ट्रपति के निर्वाचन से भिन्न होती है ।उसके निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य होते हैं। उपराष्ट्रपति का चुनाव वही व्यक्ति लड़ सकता है जो भारत का नागरिक हो, जिसकी आयु 35 वर्ष या उससे अधिक हो तथा जो राज्य सभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों द्वारा एकल संक्रमणीय मत- पद्धति एवं आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की विधि से गुप्त मतदान द्वारा होता है। पद ग्रहण करने से पहले उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के समक्ष पद निष्ठा के साथ कार्य करने की शपथ लेनी पड़ती है।
* उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या बीमारी की अवस्था में वह राष्ट्रपति के कार्य को संपन्न करता है, यदि राष्ट्रपति त्यागपत्र दे देता है अथवा उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उपराष्ट्रपति उस समय तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, जब तक नए राष्ट्रपति का चुनाव ना हो जाए।
* संविधान में यह व्यवस्था भी की गई है, कि उपराष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस देकर राज्यसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत से उसे पदच्युत करने का प्रस्ताव पारित कर सकती है। परंतु इस प्रस्ताव का अनुमोदन लोकसभा द्वारा होना भी आवश्यक होता है। उपराष्ट्रपति को कोई वेतन या भत्ता देय नहीं होता है। उसे जो वेतन भत्ते दिए जाते हैं। वह राज्यसभा के सभापति के रूप में दिए जाते हैं। उसका वेतन भत्ता लोकसभा अध्यक्ष के वेतन भत्ते के बराबर होता है।