लोक कला शैली एवं लोक नृत्य (भाग-3)

लोक कला शैली एवं लोक नृत्य (भाग:-3)

  • आंध्र प्रदेश की गोंड जनजाति का प्रसिद्ध लोक नृत्य 'गुसादी' है।
  • 'गिद्धा' महिला प्रधान नृत्य है।
  • 'तांडव नृत्य' वीर और रौद्र रस से संबंधित है।
  • 'बंबू' नृत्य कुुुकी एवं नागाओं का आदिवासी नृत्य है।
  • 'चाचरी', 'घूमर' और 'बिहू' नृत्य विधा से संबंधित है।
  • लोक नृत्य करने वाले को 'लोक नर्तक' कहते हैं।
  • मेघालय का 'बंबू' नृत्य युद्ध संबंधी नृत्य है।
  • 'इकेबाना' "फूलों की सजावट" का जापानी रूप है।
  • भारत के मेघालय भाग में 'बंबू' नृत्य प्रसिद्ध है।
  • कर्नाटक की लोक रंगभूमि 'यक्षगान' है।
  • 'घूमर','गरबा' तथा 'डांडिया' भारतीय लोक नृत्य है।
  • 'छपेली' हिमाचल प्रदेश का लोक नृत्य है।
  • 'डांडिया' गुजरात से संबंध रखने वाला नृत्य है।
  • 'चरकुला' बृजभूमि का प्रमुख लोक नृत्य है।
  • 'बधाई' बुंदेलखंड का लोक नृत्य है।
  • 'तमाशा' संगीत नाटक का प्रसिद्ध लोक स्वरूप है और यह 'महाराष्ट्र' से संबंधित है।
  • लोक नृत्य 'राहुला' का संबंध उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से है।
  • गढ़वाल क्षेत्र के लोक-नृत्यों में से झुमैला, उस समय किया जाता है, जब हाल में विवाहित लड़की प्रथम बार अपने मायके आती है।
  • बस्तर में 'डंडारी' नृत्य होली त्यौहार पर आयोजित होता है।
  • देवदास बंजारे 'पंथी' नृत्य क्षेत्र से जुड़े थे।
  • शेखावटी के प्रसिद्ध नृत्य का नाम 'गीदड़' है।
  • नृत्य नाटक 'सूरदास' एवं 'शंकरिया' "भवाई" पेशेवर जाति से संबंध रखते हैं।
  • 'सुइसिनी' लोकनृत्य राजस्थान से संबंधित है।
  • 'राउफ' लोक नृत्य जम्मू कश्मीर से संबंधित है।
  • 'झौरा' लोक/जनजाति नृत्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है।
Posted on by