ह्रयूम की भूमिका -
कांग्रेस की स्थापना के समय बहुत से क्षमतावन भारत भारतीय मौजूद थे फिर उन्हें क्या जरुरत थी हृयूम को कांग्रेस कि संगठनकर्ता बनाने की इस बात का सच तो तत्कालीन परिस्थितियों के संदर्भ में समझा जा सकता है ।
1- उस समय ब्रिटिश शासन के खुले विरोध की परंपरा की जड़े जम नहीं पाई थी ।
2- आरंभ में ही भारतीय , सरकार से दुश्मनी नहीं लेना चाहते थे और इसलिए उन्होंने हृयूम को महत्व दिया ।
3- हृयूम की भूमिका एक अच्छे संगठनकर्ता के रूप में थी ।
4- हृयूम का दृष्टिकोण भारतीयों के प्रति सकारात्मक था इतावा का कलेक्टर रहते हुए उन्होंने कृषि प्रसार सेवा हेतु उल्लेखनीय कार्य किया था इसलिए भारतीय लोगों ने उन्हें एक प्रगतिशील प्रशासक के रूप में उन्हें समझते ही नेतृत्व प्रदान किया था ।
कांग्रेस की स्थापना के वास्तविक उद्देश्य -
1- देश के हितों की रक्षा करने वाले भारतीयों के बीच मित्रता और संपर्क बढ़ाना ।
2- जातिगत , धर्मगत , प्रांतगत विभेदो को मिटाकर राष्ट्रीय एकता की भावना को पूरी तरह से विकसित करना ।
3- राजनीतिक सामाजिक आर्थिक मुद्दे पर शिक्षित वर्गों को एकजुट करना ।
4- आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा सुनिश्चित करना ।