बंगाल में 11 वीं शताब्दी में पाल वंश के पश्चात सेन वंश अस्तित्व में आया था। उसकी राजधानी राढ़ जो कि उत्तरी बंगाल में थी। इस वंश का संस्थापक सामंत सेन था । सेन वंश का प्रथम ऐतिहासिक शासक विजय सेन था जिसने दो राजधानियों की स्थापना की - पहली बंगाल में विजय पुरी तथा दूसरी बंगाल में विक्रमपुर। इस वंश का प्रसिद्ध शासक वल्लालसेन जिसने दानसागर तथा अद्भुत सागर नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी। यह दान सागर स्मृतियों पर लिखा गया था जिसमें शकुन एवं लक्षणों पर व्यापक एवं विस्तृत विवेचना हुई है । अद्भुत सागर नामक ग्रंथ खगोल विज्ञान पर लिखा गया था यद्यपि वह इसे पूरा नहीं कर सका था बाद में उसके पुत्र लक्ष्मण सेन ने इसे पूर्ण किया था । वल्लालसेन ने बंगाल में कुलीन वाद नामक सामाजिक आंदोलन चलाया था। इस वंश का एक अन्य प्रसिद्ध शासक लक्ष्मण सेन था जिसके दरबार में जयदेव धोयी तथा हलायुध को संरक्षण प्राप्त था। जयदेव ने गीतगोविंद की धोयी ने पवनदूत की तथा हलायुध ने ब्राम्हणसर्वस्व नामक पुस्तक की रचना की। इसी के शासनकाल में तुर्की आक्रमणकारी मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने लखनौती पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया। सेन वंश के प्रथम ऐतिहासिक शासक विजय सेन का वर्णन कवि जोशी के द्वारा लिखित देवपाड़ा प्रशस्ति लेख में मिलता है।