नियम - 191 _ यह नियम 1961 ई० में बनाया गया था । इस नियम के अंतर्गत सदस्य अत्यावश्यक एवं अविलम्बनीय विषय पर तुरंत अल्पकालिक चर्चा की माँग कर सकते हैं । इससे सदन की नियमावली में अविलम्ब चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव के अतिरिक्त अन्य कोई साधन सदस्यों के पास न था , इसीलिए यह नियम बनाया गया । इसके अंतर्गत सदस्य किसी भी सार्वजनिक महत्व के अविलंबनीय विषय पर अल्पकालिक चर्चा के लिए नोटिस दे सकते हैं । यह चर्चा किसी प्रस्ताव के माध्यम से नहीं होती । इस कारण चर्चा के अंत में सदन में मत - विभाजन नहीं होता । केवल सभी पक्ष के सदस्यों को सम्बद्ध विषय पर अपने विचार प्रकट करने का अवसर मिलता है ।
न्यायिक पुनर्विलोकन :- भारत में न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है । न्यायिक पुनर्विलोकन के अनुसार न्यायालयों को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि विधानमंडल द्वारा पारित की गयी विधियाँ अथवा कार्यपालिका द्वारा दिए गए आदेश संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल हैं , तो वे उन्हें शून्य / प्रभावहीन घोषित कर सकते हैं ।
गणपूर्ति ( Quorum) - सदन में किसी बैठक के लिए गणपूर्ति अध्यक्ष सहित कुल सदस्य संख्या का दसवाँ भाग होती हैं । बैठक शुरू होने के पूर्व यदि गणपूर्ति नहीं हैं तो गणपूर्ति घंटी बजाई जाती है । अध्यक्ष तभी पीठासीन होता है , जब गणपूर्ति हो जाती है ।
प्रश्न - काल - दोनों सदनों में प्रत्येक बैठक के प्रारम्भ के एक घंटे तक प्रश्न किये जाते हैं , और उनके उत्तर दिये जाते हैं । इसे प्रश्नकाल कहा जाता है । प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों को सरकार के कार्यों पर आलोचन - प्रत्यालोचना का समय मिलता हैं । इसके दो लाभ हैं - एक तो सरकार जनता की कठिनाइयों एवं अपेक्षाओं के प्रति सजग रहती हैं । दूसरे , इस दौरान सरकार अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी सदन को देती हैं।