हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO ) ने एक परमाणु घड़ी का विकास किया है , जिसका उपयोग स्वदेशी नैविगेशन । उपग्रहों में किया जाएगा ।
वर्तमान में यह घड़ी परीक्षण के दौर में है ।
सभी परीक्षणों के सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात इस स्वदेशी परमाणु घड़ी को एक प्रायोगिक नैविगेशन उपग्रह में संलग्न कर अंतरिक्ष में भेजा जाएगा , ताकि अंतरिक्ष में भी इसकी परिशुद्धता एवं स्थायित्व का परीक्षण किया जा सके ।
स्वदेशी घड़ी की आवश्यकता
उल्लेखनीय है कि परमाणु घड़ियों का उपयोग नैविगेशन उपग्रहों में पृथ्वी पर स्थित किसी वस्तु की सही स्थिति के मापन हेतु किया जाता है ।
मूलतः 7 उपग्रहों वाली भारत की क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली " नाविक ' ( NAVIC ) में शामिल प्रत्येक उपग्रह में तीन परमाणु घड़ियां संलग्न हैं ।
नाविक प्रणाली में प्रयुक्त परमाणु घड़ियां स्विट्जरलैंड के मेसर्स स्पेक्ट्रा टाइम ( M / s Spectra Time ) द्वारा निर्मित हैं ।
नाविक प्रणाली के प्रथम उपग्रह IRNSS - 1A में संलग्न इन घड़ियों में वर्ष 2016 में कुछ खराबी आ गई थी ।
इसके पश्चात इस प्रणाली के कुछ अन्य उपग्रहों में संलग्न घड़ियों में भी खराबी के मामले प्रकाश में आए ।
अगर भविष्य में भी इसी प्रकार विदेशी परमाणु घड़ियों में खराबी आती रही , तो भारत की स्वदेशी नौवहन उपग्रह प्रणाली के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है ।
इसी चिंता के मद्देनजर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने स्वदेशी परमाणु घड़ियों के निर्माण का निर्णय लिया ।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
स्वदेशी परमाणु घड़ी का विकास इसरो के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ' ( SAC : Space Applications Centre ) द्वारा किया गया है ।
IRNSS - 1A में संलग्न परमाणु घड़ियों में खराबी आ जाने के कारण इस उपग्रह के स्थानापन्न के रूप में इसरो ने अप्रैल , 2018 में IRNSS - 11 को प्रक्षेपित किया था ।
IRNSS - 1A का उपयोग अब केवल आपदा चेतावनी , मछुआरों को संभावित मत्स्य - ग्रहण ( Fishing ) क्षेत्रों की सूचना प्रेषित करने जैसी संदेशन सेवाएं ( Messaging Services ) प्रदान करने हेतु ही किया जा सकेगा ।