संविधान में प्रयुक्त प्रमुख शब्दों के अर्थ (संवैधानिक शब्दावली) भाग-4


 सचेतक - किसी भी संसद अथवा विधान मंडल या अन्य समानांतर संस्था में कुल जब किसी दल विशेष के नेता द्वारा अपने दल के सभी सदस्यों को किसी विशेष कार्य को करने अथवा न करने की अशा प्रदान की जात है तो वह उसे ह्रिवय ( सचेत करना) कहते हैं।
 ह्रियजारी करने वाले को सचेतक कहते हैं । 


 वीटो - किसी संगठन द्वारा लिए गये विष को अगीकृत कर देने के अधिकार को वीटो कहते हैं । यह शक्ति विधि मान्य है । संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद के सभी पाँच स्थायी , सदस्यों को वीटो अधिकार प्राप्त है।


कोरम - किसी भी संस्था की सभा की कार्यवाही के लिए  न्यूनतम उपस्थिति संख्या को कोरम कहते हैं । बगैर कोरम के उस सभा की कार्यवाही नहीं चल सकती । 

वफरस्टेट - दो देशों के बीच एक ऐसा देश जो दोनों का युद्ध आदि से बचाव करता है अथवा किसी राज्य द्वारा स्थापित ऐसा राज्य जो किसी शक राज्य के सीधे आक्रमण से बचाव करे । 

बायकॉट - जब व्यक्ति को किसी मुद्दे से संतुष्टि नहीं होती है तो वह बहिष्कार की नीति अपनाता है । किसी व्यक्ति सभा , संस्था या दल का मुद्दा सहित बहिष्कार बायकाट कहलाता है । 

फिफ्थ कालम् - जब किसी देश में दूसरे देश का नागरिक गुप्त सूचनाएं प्राप्त कर असंतोष उत्पन्न करने की कोशिश करता है । अथवा उस देश के नागरिकों को विद्रोह के लिए प्रेरित करता है तब उस दूसरे देश के नागरिक को ' फिफ्थ कालम ' भी संज्ञा दी जाती है। 

मैनीफेस्टो : - चुनावी घोषणापत्र को मैनीफेस्टो कहते हैं । चुनावी घोषणा पत्र विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के समय जारी किया जाता है । इससे संबंधित दल की उपलब्धियां और भविष्य में उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों का ब्यौरा प्रकाशित करता है ।

आलोगार्की - किसी भी देश में कुलीनतंत्रीय शासन का होना और उस कुलीनतंत्र द्वारा अपने वर्ग के हित की रक्षा के लिए कार्य करना आलोगार्की कहलाता है । 

एन्वाय - जब किसी देश का अधिकारिक प्रतिनिधि किसी अन्य देशों में मनोनीत किया जाता है तो उसे एन्वाय कहा जाता है । ऐसा राजनयिक किसी विशिष्ट कार्य के लिए प्रेषित किया जा सकता है । 

गुलोटिन - जब संसद या विधानमण्डल के किसी सदन में वाद - विवाद का समय पूर्व निर्धारित कर दिया जाता है तब उसे गलोटिन कहते हैं । इस प्रक्रिया में वाद - विवाद समाप्त होते ही संबंधित विषय पर मतदान करा लिया जाता है । 

दल - बदल :- जब किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का सदस्य संसद या विधानमण्डल में अपने पूर्व दल की सदस्यता छोड़कर किसी अन्य दल में सम्मिलित हो जाता है तब उस के दल - बदल की इस प्रक्रिया को फ्लोर क्रॉसिंग या डिफेक्शन कहते हैं । 

गनवोट डिप्लोमेसी – यह एक प्रकार की राजनीतिक मूलनीति है। इसके तहत कोई भी देश अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए दूसरे देश को अपनी शक्ति का भय दिखाता है । अमेरिका की वर्तमान नीति इससे मिलती जुलती है । 

महाभियोग - भारतीय संविधान द्वारा स्थापित कुछ वरिष्ट पदों के अधिकारियों को कथित कदाचार या अपराध के आधार पर संवैधानिक उपबन्धों के तहत पदमुक्त किया जा सकता है ।इस प्रक्रिया को महाभियोग प्रक्रिया कहते हैं । इसको पारित करने के लिए विशिष्ट बहुमत की आवश्यकता होती है और महाभियोग लाने में 14 दिन पूर्व संबंधित पदधारक को इस बात की सूचना दी जाती हैं । 

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