भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भाग - 5

सामंतवादी वर्ग -

                          परंपरागत सामंतवादी वर्गों में बचे खुचे  लोग तथा में जमींदार चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान राष्ट्रवादीयों द्वारा आर्थिक प्रशासनिक मांग से भयभीत हो उठा कांग्रेस उस राजनीतिक व्यवस्था के लिए खतरे के रूप में दिखाई पड़ी जिससे उन्हें जन्म दिया और पाला पोसा था इसलिए यह वर्ग ब्रिटिश सरकार की और और चिपक गया ।

आम जनता -

                   कांग्रेस का स्वरूप अभी शहरी एवं मध्यम वर्गीय था इसका सामाजिक आधार संकुचित था इसका दायरा अभी शुरू मे पढ़े-लिखे भारतीय तक ही सहमत था  जनता का एक बड़ा भाग आमतौर से निरक्षर था इसलिए जनता कांग्रेस के महत्व को‌ ठीक से नहीं समझ सकी पर कांग्रेस ने क्रमशः उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए लड़ना शुरू किया तब कांग्रेस को जनता अपनी प्रतिनिधि संस्था के रूप में स्वीकार करने लगी ।

सरकार की प्रतिक्रिया -

                                   कांग्रेस की स्थापना के आरंभिक दिनों में अंग्रेजी सरकार दृष्टिकोण उपवासपूर्ण था सरकार ने कांग्रेस को  कुछ गिने-चुने बुद्धिजीवियों के एक वर्ग के रूप में देखा और कांग्रेस के प्रति कभी-कभी मैत्रीभाव प्रकट किया तथा अधिकारियों को कांग्रेस अधिवेशन में जाने से नहीं रोका प्रथम अधिवेशन में हेनरी कार्टन जैसे अंग्रेज शामिल थे ।

      1886 दिन में कांग्रेस प्रतिनिधियों के लिए एक भोज का आयोजन किया और 1887 में मद्रास अधिवेशन में वहां के गवर्नर ने इसी तरह शिष्टाचार का प्रदर्शन किया ।

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