मंदाकिनी या आकाशगंगा

मंदाकिनी आकाशगंगा तारों के विशाल पुंज है जो गुरुत्वाकर्षण की शक्ति से एक दूसरे से बंधे हुए हैंl यह पुंज  इतने विशाल है कि इन्हें भी प्रायद्वीप ब्रह्मांड कहा जाता हैl आकाश में मंदाकिनी फैली हुई दिखाई देती है लेकिन यह कई समूह आपस में गुथकर पुंज बनते हैं l

जब पहली बार ब्रह्मांड में विस्फोट के बाद पदार्थ का विस्तार हुआ आकाश में गैस से भरे खरबो  प्राय दीप बने हैं यह गैस के प्रायद्वीप अपनी ही गति विशेष में घूमने लगेl बहुत मंद गति से घूमने वालों का आकार लगभग गोल रहाl शेष वलयाकार  रूप में भिन्न विन्न लंबाई यों के बनेl इनकी लंबाई उनके घूमने हकीकत पर आधारित थीl

वह उसे गैस प्रायदीपों के घूमने की गति इतनी अधिक थी कि उनका आकार चपटी तश्तरी की तरह हो गया इन तस्वीरों के किनारों से सर्किल भुजाएं निकलीl इंन तस्त्रियों का केंद्र मंदाकिनी केंद्र के चारों ओर वर्तुल आकार पथ में निरंतर घूमने वाले असंख्य नक्षत्रों के द्वारा बनाl

सर्पिल भुजाओं का निर्माण बहुत अधिक सूक्ष्म धूल से भरी सामान्य आवर्तन में फंसी गैसों की धाराओं से हुआl जो सर्किल रूप से ढल गई lइस तरह मंदाकिनी विभिन्न आकारों और रूप में निर्मित हुई जो प्रायद्वीप स्थित होने लगे स्थानीय संघनन आदि नक्षत्रों की प्रक्रिया मंदाकिनी के कई बिंदुओं से शुरू होने लगीl

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