भारतीय संविधान - संविधान संशोधन

    भाग 20, अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की प्रक्रिया निहित है यह प्रक्रिया साउथ अफ्रीका से ली गई है। भारतीय संविधान के किसी भी भाग (प्रस्तावना में भी 42 संविधान संशोधन से) में संविधान संशोधन किया जा सकता है। लेकिन संविधान में ऐसा कोई संविधान संशोधन नहीं किया जाएगा जो संविधान के मूल ढांचे का अतिक्रमण कर रहा हो (केशवानंद भारती वाद 1973) संविधान संशोधन समानतया तीन प्रकार के होते हैं-

क - संसद के साधारण बहुमत द्वारा - ऐसे संविधान संशोधन संसद के साधारण बहुमत से किए जाते हैं।

विषय-

   1. किसी भी राज्य की सीमा का नाम में परिवर्तन

   2. नए राज्यों का प्रवेश व गठन।

   3. दूसरी अनुसूची के विषय।

   4. संसद में गणपूर्ति।

   5. राज्य भाषा का प्रयोग।

   6. उच्चतम या उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या का निर्धारण।

ख - विशेष बहुमत द्वारा - ऐसे संविधान संशोधनों को संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक होता है।

विषय -

    1. मूल अधिकार से संबंधित संशोधन।

    2. नीति निर्देशक तत्वों से संबंधित संशोधन।

ग - विशेष बहुमत के साथ-साथ आधे राज्यों के समर्थन के द्वारा - ऐसे संविधान संशोधनों को संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों द्वारा साधारण बहुमत से स्वीकृति होना आवश्यक होता है

NOTE - राज्यों के लिए इस पर अनुमति देने के लिए समय सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है।

विषय -

     1. राष्ट्रपति का निर्वाचन व इसकी प्रक्रिया।

     2. केंद्र व राज्य कार्यकारिणी शक्तियों का विस्तार।

     3. स्वयं अनुच्छेद 368।

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