भारतीय संविधान Easy Notes - 20 (भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं)

क्रमशः..

Day - 20

भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं

  • संविधानशब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘कॉन्स्टीतट्यूरे’ से हुई है, अर्थात् राज्य को शासित करने वाले सिध्दान्त ही संविधान की परिधि में आते है।
  • किसी देश का संविधान उस देश की सरकार का मूल स्वरूप या नींव होता हैं। यह कानून एवं नियमों का ऐसा संग्रह होता है जिसके आधार पर शासन चलाया जाता है तथा शासन के विभिन्न अंग अपने अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का प्रयोग करते हैं।
  • 1885 में कांग्रेस के गठन के बाद से भारतीयों में राजनीतिक चेतना जागृति हुई और 1895 में उनकी अभिव्यक्ति ‘स्वराज्य विधेयक’ के रूप में हुई, जिसे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के निर्देशन में तैयार किया गया था।
  • 1922 में ‘स्वराज’ का अर्थ समझाते हुए महात्मा गांधी ने यह संकेत दिया था कि – ‘भारतीय संविधान भारतीयों द्वारा उनकी इच्छानुसार तैयार किया जायेगा।‘ महात्मा गांधी की इस मांग ने भारतीय नेताओं को भारतीय संविधान की मांग के लिए उत्प्रेरित किया।
  • 1924 में मोतीलाल नेहरू द्वारा ब्रिटिश सरकार से यह मांग की गयी कि भारतीय संविधान के निर्माण के लिए ‘संविधान सभा’ का गठन किया जाये। 1929 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग की।
  • ‘संविधान सभा’ के विचार का औपचारिक रुप से प्रतिपादन साम्यवादी नेता एम.एन.राय द्वारा किया गया, जिसे 1934 में जवाहरलाल नेहरू ने मूर्त रूप प्रदान किया। नेहरू जी द्वारा संविधान निर्माण की मांग के बाद भारतीयों द्वारा संविधान के निर्माण की मांग कांग्रेस दल की अधिकृत नीति का एक अनिवार्य अंग बन गई।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रवर्तन के बाद कई राज्यों में भारतीयों की सरकार गठित हुई तथा राज्य विधान सभाओं में कांग्रेस दल के सदस्यों को बहुमत प्राप्त हुआ। राज्य विधानसभाओं द्वारा प्रस्ताव पारित करके भारतीयों द्वारा निर्मित संविधान की मांग की गई।
  • 1935 के अधिनियम के लागू होने के परिणामस्वरूप 1937 में प्रान्तीय विधानसभाओं के चुनाव सम्पन्न हुए। इस चुनाव के परिणामस्वरुप 6 प्रान्तों में कांग्रेस की सरकार, 3 प्रान्तों में मिली जुली सरकार, 1 प्रान्त में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार तथा 1 प्रान्त में कृषक प्रजा पार्टी की सरकार बनी।

जारी..

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