टीकाकरण के लक्ष्य को शतप्रतिशत पूर्ण करने का लक्ष्य

• केंद्रीय स्वास्थ्य  मंत्रालय शतप्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रणनीति तैयार की है। जिसके तहत सभी राज्यों के जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्य केंद्रों के साथ ही आशा वर्कर्स की मदद से जन्म लेने वाले 0 से 1 साल की आयु तक के बच्चों को सटीक टीकाकरण करेगा। इसके लिए नोडल अधिकारियों की टीम सघन निगरानी करेगी, जो शिशुओं को लगाए जाने वाले टीकाकरण का डाटा केंद्र को देगा। 
• आंकड़े बताते हैं कि भारत में दुनिया भर में खसरे से संबंधित मौतों का एक तिहाई हिस्सा है। लक्ष्य की ओर: टीकीकारण कार्यक्रम के उपनिदेशक डा. एके गड़पाइले के अनुसार खसरा अत्यधिक संक्रामक रोग है और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एक देश को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सभी बच्चों में से कम से कम 95 प्रतिशत बच्चों को टीके की दो खुराक प्राप्त हो चुकी हों। 
• लगभग 15 प्रतिशत टीका ले चुके बच्चे पहली खुराक से प्रतिरक्षा विकसित करने में विफल रहते हैं, जिसका अर्थ है कि यदि केवल 80 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षित हैं, तो इसका प्रकोप होने की संभावना है। खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है जो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से खांसी और छींकने के जरिये फैलता है। 
• संक्रमण के बाद तेज बुखार, दाने जो शरीर में फैल जाते हैं, खांसी, नाक बहना और आंखों में पानी और लालिमा इसके प्रमुख लक्षण हैं। खसरा प्रतिरक्षा पण्राली को कमजोर करता है और अक्सर गंभीर जटिलताओं की ओर ले जाता है, जिसमें अंधापन, एन्सीफेलाइटिस, गंभीर दस्त और निमोनिया जैसे श्वसन संक्रमण शामिल हैं।
• टारगेटिड राज्य: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उड़िसा, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडू।यह भी: डा. संजय चौधरी के अनुसार टीकाकरण नुकसान कम करने की एक अत्यंत प्रभावी रणनीति है। टीकाकरण निवारक दृष्टिकोण का एक तरीका है, क्योंकि यह रोग होने के बाद उसे ठीक करने से उलट है। 
• खसरा-रूबेला (एमआर) टीका दो बीमारियों को रोकने में मदद करता है। यह तब दिया जाता है जब बच्चा 9 से 12 महीने के बीच होता है और एक बार फिर से इसे 16-24 महीने के बीच दिया जाता है। सरकार इसे अपने टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से नि:शुल्क प्रदान करती है। समय की आवश्यकता है कि टीकाकरण के लाभों पर बड़े पैमाने पर जागरूकता है और अधिक परिवारों को अपने बच्चों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाये।
• जरूरत तय: यूनिसेफ इंडिया प्रोटोकॉल सोनिया सरकार के अनुसार खसरा के विपरीत, रूबेला एक हल्का वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से बच्चों में होता है। एक महिला जो गर्भावस्था के शुरुआती चरण में रूबेला वायरस से संक्रमित होती है, उसे भ्रूण में स्थानांतरित करने की 90 प्रतिशत संभावना होती है। कुछ मुद्दे जो वायरस पैदा कर सकते हैं, उनमें नवजात शिशुओं में श्रवण दोष, आंख और हृदय दोष तथा मस्तिष्क की क्षति शामिल हो सकती है। इससे सहज गर्भपात और भूण की मृत्यु भी हो सकती
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