प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में योजना आयोग के स्थान पर एक नई संस्था नीति आयोग की घोषणा की ।
1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल की एक प्रस्ताव के तहत एक नई संस्था जिसे राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (National institution for transforming india- NITI) कहा गया,अस्तित्व में आई ।आम तौर पर इसे नीति आयोग के नाम से जाना जाता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला यह आयोग सरकार के थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा तथा केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों के लिए भी नीति निर्माण करने वाले संस्थान की भूमिका निभाएगा। केंद्र व राज्य सरकारों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दों पर रणनीतिक व तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य करेगा ।पंचवर्षीय योजनाओं के भावी स्वरूप के संबंध में सरकार को सलाह देने का भी कार्य करेगा ।
इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री स्वयं होते हैं ।
योजना आयोग जिसे 15 अगस्त 2014 को समाप्त करने की घोषणा की गई ।भारत में योजना आयोग के संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं था ।15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के द्वारा योजना आयोग की स्थापना की गई थी। योजना आयोग का अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होता था। प्रथम योजना आयोग के उपाध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा थे।