विभिन्न जलवायु प्रदेश में औसत वार्षिक वर्षा:-

       विश्वत रेखीय जलवायु प्रदेश में औसत वार्षिक तापमान सर्वाधिक होता है अतः यहां वायुमंडलीय आद्रता भी अधिक होती है यहां वार्षिक और दैनिक तापांतर भी अधिक नहीं होता वार्षिक औसत तापान्तर की अपेक्षा दैनिक तापांतर थोड़ा अधिक होता है ।वार्षिक तापांतर 2 से 3 डिग्री सेंटीग्रेड होता है जबकि दैनिक तापांतर 10 डिग्री सेंटीग्रेड तक हो जाता है दोपहर के बाद प्राया तापमान 29 से 34 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच सकता है जबकि रात्रि के समय गिरकर 20 से 24 डिग्री हो सकता है इस कारण रिश्वत रेखीय प्रदेश में रात्रि को ही शीत ऋतु कहते हैं औसत वार्षिक तापमान अधिक होने के कारण यहां वर्षा  संवहिनीय प्रकार की होती है यद्यपि  वर्षा का कुछ भाग पर्वतीय वर्षा के अधीन होता है यहां वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है सर्वाधिक वर्षा के महीने अप्रैल तथा अक्टूबर-नवंबर होते हैं। जब सूर्य की किरणें लंबवत होती हैं तब से 1 माह बाद सबसे अधिक वर्षा होती है।

        उष्णकटिबंधीय जलवायु प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के समय सूर्य की लंबवत किरणें पड़ने के कारण विश्वत रेखीय जलवायु प्रदेश की अपेक्षा यहां का मासिक तापमान अधिक हो जाता है जबकि शीत ऋतु की अपेक्षा तापमान अपेक्षाकृत कम हो जाता है इस जलवायु प्रदेश में औसत वार्षिक तापमान विषुवत रेखीय की अपेक्षा कम होता है अतः यहां विषुवत रेखीय की अपेक्षा वर्षा भी कम होती है ग्रीष्म ऋतु के समय व्यापारिक पवनों द्वारा पर्वतीय एवं संवहनीय वर्षा होती है । इस वर्षा में कुछ हिस्सा चक्रवाती वर्षा का भी होता है। मानसूनी जलवायु प्रदेश पूर्वी तट पर होने के कारण विश्व में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करता है ।इन पवनों से पूर्व से पश्चिम वर्षा की मात्रा कम होती जाती है तथा पश्चिमी तट पर स्थित क्षेत्र व्यापारिक पवनों के अधीन आने के कारण सबसे कम वर्षा प्राप्त करता है जिससे यहां मरुस्थलों का निर्माण होता है 20 से 30 डिग्री अक्षांश के मध्य पश्चिमी किनारों पर मरुस्थलीय जलवायु पाई जाती है।

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