राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के संदर्भ में जानकारी

  ग्रीनपीस इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ' एयरपोक्लिपस ' का तीसरा संस्करण जारी किया ।इस रिपोर्ट में यह सामने आया कि 139 शहर जहाँ वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक से अधिक हैं , को हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम ( एनसीएपी ) मेंशामिल नहीं किया गया है ।रिपोर्ट में यह इशारा किया गया कि अगर हम एनसीएपी के 2024 तक 30 प्रतिशत प्रदूषण कम करने के लक्ष्य पर भरोसा कर भी लें तो भी ऐसे 153 शहर छूट जायेंगे जिनका प्रदूषण स्तर राष्ट्रीय मानक से 2024 में भी अधिक होगा ।इस रिपोर्ट में 313 शहरों को साल 2017 में पीएम10 के औसत स्तर का विश्लेषण किया गया है ।इसमें सामने आया कि 313 शहरों में से 241 ( 77 % ) शहरों का पीएम10 का स्तर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ( सीपीसीबी ) द्वारा  जारी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक से कहीं |अधिक है ।इस तरह ये सारे 241 शहर अयोग्य शहरों की सूची में आते हैं , जहाँ एनसीएपी के तहत कार्ययोजना बनाने की जरूरत है ।गौर करने |वाली बात यह है कि एनसीएपी ( नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम ) में सिर्फ 102 शहरों को ही शामिल किया गया था , जिसका आँकड़ा 2011 - 2015 से लिया गया था ।अब इन शहरों में 139 नये शहर बढ़ गए हैं , जहाँ का आँकड़ा उपलब्ध है और जिसकी वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक से अधिक है ।रिपोर्ट में 2024 तक पीएम10 के स्तर को सभी शहरों में 30 प्रतिशत तक कम करने के एनसीएपी के लक्ष्यों को मानते हुए यह कहा गया है कि पूरे देश में 153 शहर ऐसे होंगे जो राष्ट्रीय मानक को पूरा नहीं करेंगे , वहीं 12 शहर ही ऐसे होंगे जोविश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों को पूरा कर पायेंगे ।  
  
   यदि 2024 तक दिल्ली में प्रदूषण स्तर को 30 प्रतिशत कम भी कर दिया जायेगा तो दिल्ली की पीएम10 का स्तर फिर भी 168 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होगा जो राष्ट्रीय मानक ( 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर ) से तीन गुणा अधिक होगा ।एनसीएपी में शामिल शहरों में 43 प्रस्तावित स्मार्ट सिटी भी शामिल हैं ।हालाँकि दिलचस्प बात यह है कि साल 2017 के पीएम10 स्तर के डाटा को देखा जाये तो पता चलता है कि प्रस्तावित  |100 स्मार्ट सिटी में से 65 ऐसे हैं जहाँ वायु |प्रदूषण का स्तर अधिक है और सिर्फ 12 शहर की वायु गुणवत्ता ही राष्ट्रीय मानक के अनुरूप हैं ।इससे साफ - साफ एनसीएपी के व्यापक होने |पर सवाल उठता है ।

   यह चिंताजनक है कि हमारे ज्यादातर चिह्नित स्मार्ट सिटी भी खराब वायु प्रदूषण की चपेट में हैं और उनमें कई जगह तो वायु निगरानी डाटा भी उपलब्ध नहीं है ।

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