भारत कि नदियाँ भाग 2

चंबल नदी अपने मार्ग में मारवाड़ का निर्माण करती है यह अत्यधिक भूमि कटान के लिए जानी जाती है ।                       कोसी नदी पद विचलन के लिए जानी जाती है यदि कोई पहाड़ नदी के प्रवाह को प्रभावित करता है तो इसे जल विभाजक कहते हैं अरावली और पश्चिमी घाट प्रसिद्ध जल विभाजक हैं ।            भारत की 77% नदियों को जल बंगाल की खाड़ी एवं 23% अरब सागर में गिरता है। प्रवाह की दृष्टि से भारतीय नदियों को 2 वर्गों में विभाजित किया गया है 

पूर्ववर्ती अपवाह                                                                      अपवर्ती अपवाह    

पूर्ववर्ती अपवाह = यह नदियां अपने मार्ग की बाधाओं को काटकर आगे बढ़ता है हिमालय की नदियां इसी प्रकार की हैं।

अपवर्ती अपवाह= यह नदिया ढाल की ओर बढ़ती है प्रदीप यह नदियांं इसी  श्रेणी मेंं आती है ।                                                   भारतीय नदियों को दो अन्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

हिमालयी या उत्तर भारतीय नदियां                                             प्रायद्वीपीय नदियां

उत्तर भारतीय नदियां = इन नदियों का उद्गम उत्तर भारत के ग्लेशियर से होता है।                                                        गोमती पीलीभीत के दल दलों से निकलती है हिमालय नदियों को एक चौथाई जल ग्लेशियरों के पिघलने से प्राप्त होता है।          विंध्य और अरावली से निकलने वाले कुछ नदियां भी इन्हीं नदियों में मिल जाते हैं ।                                                         हिमालयी नदियां अपेक्षाकृत युवा हैं अभी इनका मार्ग निश्चित नहीं हुआ है अतः इन में बाढ़ आती रहती है ।                                 यह नदियां धर्म धरातल से प्रवाहित होती हैं अतः मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती है । इन नदियों में वर्ष भर जल रहता है ताहिर में नौवहन संभव है।.........

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