सिक्ख (भाग-3) गुरु गोविंद सिंह

*     गुरु गोविंद सिंह सिक्खों के दसवें गुरु हुए और यह गुरु तेग बहादुर के एकमात्र पुत्र थे। इनका जन्म पटना में 1668 ई. में हुआ था। इन्होंने 1699 मेंं खालसा की स्थापना की।

*    गुरु गोविंद सिंह के 1699 ई. में बैसाखी के अवसर पर सिखों की एक विशाल सभा का आयोजन किया और इसी सभा में पांच व्यक्तियों ने अपने सिरों की बलि देने के लिए सामने आए। दयाराम, धर्मदास, भीखमचंद्र, साहबचंद्र और हिम्मत राय। बाद में इन्हें पंच प्यारे के नाम से पुकारा गया।

*    गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखों को अपने नामों के आगे सिंह लगाने को कहा और अपने पास पांच वस्तुएं केस, कंघा, कड़ा, कच्छ और कृपाण रखने की अनुमति दी।

*    आनंदपुर का प्रथम युद्ध गुरु गोविंद सिंह और अंग्रेजों के बीच 1701 ईसवी में हुआ और आनंदपुर का द्वितीय युद्ध 1704 ईस्वी में हुआ इसी युद्ध में इनकी माता और दो पुत्रों जुवाबर सिंह और फतेह सिंह को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया।

*     खिदराना के युद्ध में आदिग्रंथ खो गया था। जिसका गुरु गोविंद सिंह ने पुनः संकलन किया और तभी से इस ग्रंथ का नाम दशम पादशाह का ग्रंथ पड़ा।

*    गुरु गोविंद सिंह ने बहादुर शाह को युद्ध में सहयोग दिया और बाद में गोविंद सिंह, बहादुर शाह के साथ दक्षिण भारत गये और गोदावरी के तट पर नांन्देर नामक स्थान पर अक्टूबर 1708 ई. में जमशेद खान नामक पठान ने उनकी हत्या कर दी।

*    गुरु गोविंद सिंह ने कहा था कि अब कोई गुरु नहीं होगा और गुरु वाणी ही सिख संप्रदाय का गुरु का कार्य करेगी इसीलिए आदिग्रंथ को गुरु ग्रंथ भी कहा जाता है।

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