राज्यकाल
१९ जनवरी १६२८ – ३१ जुलाई १६५८ (३० साल १९३ दिन)
राज्याभिषेक
१४ फ़रवरी १६२८, आगरा
पूर्वाधिकारी
जहाँगीर
उत्तराधिकारी
औरंग़ज़ेब
पत्नी
कन्दाहरी बेग़म
अकबराबादी महल
मुमताज महल(अरजुमंद बानो बेगम)
हसीना बेगम
मुति बेगम
कुदसियाँ बेगम
फतेहपुरी महल
सरहिंदी बेगम
श्रीमती मनभाविथी
पूरा नाम
अल् आजाद अबुल मुजफ्फर शाहब उद-दीन मोहम्मद खुर्रम
जन्म
खुर्रम
५ जनवरी १५९२
लाहौर,पाकिस्तान
मृत्यु
२२ जनवरी १६६६ (आयु ६४) संशय है
आगरा किला, आगरा,भारत
कब्र
ताज महल
सन्तान
पुरहुनार बेगम
जहांआरा बेगम
दारा शिकोह
शाह शुजा
रोशनारा बेगम
औरंग़ज़ेब
मुराद बख्श
गौहरआरा बेगम
कुल
तैमूर का कुल
पिता
जहाँगीर
सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे। उनके मुख्य सहाय्यक मुब्बशीर खान गांजापुरी को वो बहुत मानते थे उनके शासनकाल को मुग़ल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल बुलाया गया है। शाहजहाँ द्वारा बनवायी गयी ईमारतों में लाल किला,जामा मस्जिद,मोती मस्जिद,ताज महल आदि हैं।
इतिहास को पढ़ने के बाद ही पता लगता है कि ताजा अपनी ही बेटी से ही अनैतिक संबंध थे समाज में जब इस बात का प्रसार हुआ तो शाहजहां ने एक मंच लगाकर और हदीस का उदाहरण देते हुए की जिस प्रकार माली किसी बगीचे में फूल लगाता है वह उस फल का स्वयं मालिक होता है ठीक उसी प्रकार हदीस का उदाहरण देते हुए शाहजहां ने अपने इस तथ्य को रखा और शाहजहां मुमताज के मरने के बाद उसकी बहन से शादी कर ली लोगों का मानना है मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया यह सही भी है पर उस पर आज भी कुछ ऐसे तथ्य हैं जिससे यह साबित नहीं होता की वह मुमताज की याद में बनवाया गया वह क्योंकि अगर मुमताज की याद में बनवाया गया होता तो वह मुमताज की बहन से शादी ना करता उसके घर में लगभग 8000 थी