पुराना रोग, नए तेवर

कोरोनरी हृदय रोग मानव समाज के सामने आज बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है l पर आम सोच के विपरीत यह कोई नया रोग नहीं है चिकित्सा साहित्य में उसका वर्णन 2500 वर्ष पुराने आयुर्वेद के प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में विस्तार से मिलता है l किंतु जैसे जैसे हमने प्रगति की है, सुख सुविधाओं के साधन बढे हैंl हमारे जीने का ढंग बदल गया हैl यांत्रिकता के स्वर हर तरफ मुखर दिखाई देते हैंl

शारीरिक निष्क्रियता बढ़ती जा रही हैl मेहनत मशक्कत के अवसर घटते जा रहे हैंl खानपान संतुलित नहीं रहा यह इस सुख समृद्धि का ही श्राप है कि समाज में हर तरफ तनाव का बोलबाला है lआर्थिक सामाजिक आस्थिरता है, मानवीय रिश्तो में अपनापन घट गया है l

इस नई व्यवस्था की नई चुनौतियों से जूझते मानुष के अंतर्मन में मानसिक संतोष बेचैनी और तनाव गहराता जा रहा हैl समाज के इन्हीं नए तेवरों  से प्रेरित होकर कोरोनरी हृदयरोग दुनिया के सभी देशों से ज्यादा फैल रहा हैl पिछले तीन दशकों में भारत में कोरोनरी ह्रदय रोग की दर में 3 गुना वृद्धि होती दिख रही है शहरों में यह रोग अधिक फैला हुआ है lगांव में भी अब इस रोग से बचे हुए नहीं हैं कोरोनरी धमनी में रुकावट आई है वह जितनी बड़ी होती है उतना ही बड़ा दिल का हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है lदिल के इस हिस्से में अगर किसी दूसरी कोरोनरी धमनी से खून की सप्लाई नहीं होती तो यह पूरा का पूरा हो जाता हैl

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