चित्रकला की शुरुआत

इतिहास की अविच्छिनता के संबंध में हमारी जानकारी में कुछ अंतराल में होने के बावजूद भारतीय चित्रकला का आरंभ आदिम कालीन मनुष्य की उस कला से माना जाता है जो होशंगाबाद, मिर्जापुर और भीमबेटका जैसे स्थानों पर कंदराओ और गुफाओं में सुरक्षित रही है l

मैग्डेली  काल 15000 इसा  पूर्व की पाषाण कालीन चित्रकला का इतिहास इतना पुराना नहीं लगता किंतु यह बात सभी लोग स्वीकार करते हैं lयदि समुदाय एक दूसरे से प्रथक रहते हैं तो आदिम कालीन प्रज्ञा  शक्ति एवं कल्पना काफी लंबी अवधि तक जीवित रहती है l

सिंधु घाटी सभ्यता का 3000 ईसा पूर्व से 1500 एक परिष्कृत शहरी सभ्यता का काल थाl लेकिन चूंकि उस समय के मकान आदि शेष नहीं हैं ,अतः भित्ति चित्र हमें नहीं मिल सके लेकिन प्राचीन क्रीट की सभ्यता में चित्रकारी और मिट्टी के बर्तनों की चित्रकारी में काफी समानता मिलती हैl प्रारंभिक बौद्ध धर्म में शायद उस भावना को सही रूप में नहीं समझा था lक्योंकि उसने केवल क्षणभंगुर वक्त और पीड़ा की व्यापकता को ही देखाl

जब सिद्धार्थ ने महल छोड़ा तो वह अपने पुत्र को भी अपने साथ ले जाना चाहते थे किंतु है उसे नहीं ले जा सके क्योंकि बच्चे की मां ने नींद में भी अपने पुत्र के ऊपर रक्षा का हाथ रखा था lज्ञान प्राप्त के बाद भी उन्हें यह बात याद रहे सब लोग से सब जीवो की रक्षा की बात कही उन्होंने निर्वाण स्वीकार नहीं कियाl बल्कि पीड़ा से त्रस्त मानवता की सहायता के लिए केवल मनुष्य के रूप में ही नहीं बल्कि हाथी और हंस के रूप में जन्म लियाl

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