अनुच्छेद 15-
इसके अनुसार राज्य अपने नागरिकों के साथ धर्म, वंश, जाति, मूल, लिंग, भाषा व जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
अनुच्छेद 15(iii)-
93वें संविधान संशोधन 2005 में निजी विद्यालयों में आरक्षण का प्रावधान किया गया।
अनुच्छेद 16-
राज्य राज्याधिन नौकरियों में धर्म, मूल, जाति, वंश के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
अनुच्छेद 16(iii)-
इसमें निवास के स्थान पर राज्य संघ, राज्य प्रदेशों के निवासियों को वरीयता प्रदान किया जाता है।
अनुच्छेद 16(iv)-
इसके अनुसार राज़्य ओबीसी वर्ग के विकास के लिए विशेष आरक्षण दे सकता है।
NOTE-
ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधि देने के लिए 1779 में बीपी मंडल आयोग का गठन किया। जिसकी सिफारिशों को 1989 में बी पी सिंह की सरकार में लागू किया गया इसके अनुसार राज्याधीन नौकरियों में ओबीसी वर्ग के लिए 27% आरक्षण प्रस्तावित किया गया।
अनुच्छेद 17-
इस अनुच्छेद के तहत अस्पृश्यता का अंत किया गया और इसके अंतर्गत 1955 में अस्पृश्यता अधिनियम पारित किया गया। इसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार इस तरह का पाया जाता है तो उसे 6 माह की सजा या ₹500 जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।
NOTE-
1995 में 77वें संविधान संशोधन में नाम बदलकर सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम रखा दिया गया।
अनुच्छेद 18-
इसके अंतर्गत उपाधियों का अंत किया गया लेकिन शिक्षा व सेना संबंधी उपाधियां अभी भी मान्य है।
NOTE-
भारत रत्न, पदम विभूषण, पदम भूषण, पदम श्री को उपाधि नहीं माना गया है।
भारत रत्न पुरस्कार 1954 से इसे दिया जाने लगा लेकिन 1970 में बंद कर दिया गया था। 1980 से पुनः शुरू किया गया।