आधुनिक इतिहास-1857 की क्रांति की शुरुआत

सैनिकों का विद्रोह-

    सर्वप्रथम 23 जनवरी 1857 को दमदम के सैनिकों ने करतूतों के प्रयोग को अस्वीकार कर दिया।  29 मार्च 1857 को 34वीं रेजीमेंट बैरकपुर के सिपाही मंगल पांडे ने लेफ्टिनेंट बैग एवं सर्जेंट हडसन को गोली मारी। अंग्रेजों ने मंगल पांडे को तुरंत फांसी दे दी। 10 मई 1857 को मेरठ के सैनिकों ने विद्रोह किया।

दिल्ली का विद्रोह-

    इस समय दिल्ली का शासक बहादुर शाह जफर द्वितीय था। अंग्रेजों ने बहादुर शाह केो गिरफ्तार कर लिया और निर्वासीित कर रंगून भेज दिया। जहां 1862 में उसकी मृत्यु हो जाती है।

लखनऊ का विद्रोह-

    लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल किया था। बृजेशकादिर इस समय लखनऊ का नवाब था। लखनऊ का चीफ, कमीशन लारेंस रेजिडेंसी की रक्षा करते हुए मारा गया। कैंपबेल ने लखनऊ के विद्रोह का दमन किया तथा बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण करने से इंकार कर दिया और नेपाल भाग गई।

कानपुर का विद्रोह-

     कानपुर के विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब ने किया इनका वास्तविक नाम धोन्दू पंडित था। नाना साहब की ओर से लड़ने की मुख्य भूमिका तात्या टोपे की थी, इनका नाम रामचंद्र पांडुरंग था। यहां के विद्रोह का भी दमन कैंपबेल ने किया और नाना साहब नेपाल चले गए।

झांसी का विद्रोह-

यहां पर गंगाधर राव की विधवा पत्नी रानी लक्ष्मीबाई ने विद्रोह का नेतृत्व किया और अंग्रेजो से उसके दत्तक पुत्र दामोदर राव को झांसी की गददी देने से इंकार कर दिया। रानी लक्ष्मी बाई की मृत्यु ग्वालियर में एक युद्ध के दौरान हुई।

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