आधुनिक भारत- प्रमुख आंदोलन

सन्यासी विद्रोह-

    यह लोग शंकराचार्य के अनुयाई थे। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ का कथानक इसी विद्रोह पर आधारित है।

वहाबी आंदोलन-

    रायबरेली के सैयद अहमद इस आंदोलन के प्रवर्तक थे। वहाबी आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य दारुल-हर्ब से दारुल-इस्लाम में परिवर्तन करना था।

कूका आंदोलन-

    कूका आंदोलन की शुरुआत 1840 में सेन साहब (भगत जवाहर मल) द्वारा किया गया लेकिन रामसिंह कूका के समय में यह आंदोलन सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ। इसीलिए इस आंदोलन का संस्थापक रामसिंह कूका को माना जाता है। रामसिंह ने नामधारी आंदोलन चलाया था। अंग्रेजों ने इन्हें भी रंगून भेज दिया।

मुंडा विद्रोह-

    इस विद्रोह का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया था। इसने कहा था कि 'कलयुग खत्म कर सतयुग लाएंगे और अब हमारी इनसे लड़ाई होगी और इनके खून से जमीन ऐसी लाल होगी जैसे - लाल झंडा। अंग्रेजों ने इसे गिरफ्तार करके रांची के जेल में डाल दिया और वहीं पर इसकी मृत्यु हो गई।

किसान आंदोलन-

    1859-60 में किसानों ने आंदोलन किया जो नील आंदोलन के नाम से जाना गया। नील आंदोलन बंगाल के नदिया जिले के गोविंदपुर गांव के दो भूत पूर्व कर्मचारी दिगंबर विश्वास और विष्णु विश्वास के नेतृत्व में किया गया। दीनबंधु के नाटक नील दर्पण में नील आंदोलन के विषय में लिखा गया है। नील आंदोलन के अध्यक्ष श्री टैंकर थे।

बारदोली आंदोलन-

    बारदोली सत्याग्रह की शुरुआत गुजरात के सूरत जिले से हुई थी। बारदोली सत्याग्रह के विद्रोह का नेतृत्व सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया था। यहां की औरतों के द्वारा इन्हें सरदार की उपाधि प्रदान की गई थी। 

Posted on by