औद्योगिकीकरण

 विश्व में तीव्र औद्योगिक विकास के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड ,कार्बन मोनो ऑक्साइड ,क्लोरोफ्लोरोकार्बन, मेथेन ,नाइट्रस ऑक्साइड आदि गैसों की मात्रा बढ़ने लगी जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरुप मानव सभ्यता के इतिहास में बीता दशक सर्वाधिक गर्म दशक और 1998 ई.सबसे गर्म वर्ष रहा और ग्लोबल वार्मिंग के रूप में एक वैश्विक समस्या हमारे समक्ष मौजूद हो गया है।

यह एक ऐसी समस्या है जिसके लिए विकसित राष्ट्र और उनकी आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं किंतु इसकी सजा सभी को भुगतनी पड़ रही है। ध्यान देने योग्य है कि जितने भी विकसित राष्ट्र हैं उनमें से 80% देश समशीतोष्ण जलवायु प्रदेश में स्थित है।

तीव्र औद्योगीकरण के कारण जहां एक ओर कृषि योग्य भूमि घटती जा रही है वहीं दूसरी और इसके परिणाम स्वरूप विश्वव्यापी कार्बन चक्र प्रभावित हो रहा है।वर्तमान में कोयले के ईंधन के रूप में घरेलू तथा औद्योगिक उपयोग के कारण बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस वायुमंडल में एकत्रित हो रही है।वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का मौजूदा स्तर 430 पार्टिकल प्रति 10 लाख है जबकि औद्योगिक क्रांति से पूर्व यह 280 पीपीएम था।इस इस  अंतर के कारण विश्व का तापमान लगभग आधााा डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।

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