रेडियोएक्टिव प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Radioactive Pollution)-

विकिरण अन्य प्रदूषकों की अपेक्षा जीवों पर अधिक खतरनाक प्रभाव डालते हैं क्योंकि उनके प्रभाव कई पीढ़ियों तक चलते रहते हैं। 

कायिक प्रभाव (Somatic Effect)- 
विकिरण जीवों के ऊतकों और भागों को नुकसान पहुंचाकर उनकी कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न करते हैं। उच्च तीव्रता के विकिरणी प्रभाव में आने से एनीमिया, रक्तस्राव आदि के कारण प्राणियों की मृत्यु भी हो जाती है। 

आनुवंशिक प्रभाव (Genetic Effect):-
विकिरणों के प्रभाव से जीवों के आनुवांशिक गुणों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। उद्योग, अनुसंधान एवं औषधि में रेडियोएक्टिव न्यूक्लाइड का प्रयोग करने वाले लोग अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होते हैं। ड्रोसेफिया पर किया गया अध्ययन दिखाता है कि विकिरणों के प्रभाव से उत्परिवर्तन दर (Mutation Rate) उच्च हो जाता है। उच्चवर्गीय प्राणी (जैसे - मानव) निम्नवर्गीय प्राणियों (जैसे-कीट) की अपेक्षा इन विकिरणों से अधिक प्रभावित होते हैं। 

विकिरण के कारण जंतुओं के बाल उडना, खाल में जलन, गांठ पड़ना, त्वचा का रंग उड़ना आदि प्रभाव देते हैं। विकिरण कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है और मृत्यु का कारण बन सकता है। विकिरण के कारण जंतुओं में उत्परिवर्तन होता है । 

उत्सर्जन का प्रभाव जलीय पारितंत्र, मृदा आदि पर पड़ता है, इसके बहुत से नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। 

रेडियोएक्टिव पोल के नियंत्रण के उपाय 
(Measures to Control Radioactive Pollution)-
परमाणु बम के भूमिगत, वायुमंडल या जलमंडल परीक्षण  पर रोक लिया जाए। 

मानव उपयोग वाले यंत्रों को रेडियोधर्मिता से मुक्त करना होगा। 

नाभिकीय तत्त्वों के परिवहन में सावधानी। 


परमाणु अस्त्रों पर रोक और निशानीकरण की प्रक्रिया।

चिकित्सीय व अनुसंधान सामान (रेडियोएक्टिव युक्त) का वैज्ञानिक तरीके से निपटान।

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