शिक्षा और चरित्र निर्माण से जीवन निर्माण( पार्ट 2)

जब मनुष्य को ठोकर लगती है, ठोकर खाने के बाद मनुष्य संभल कर चलता है जैसे सोना आग में तप कर शुद्ध  और अधिक चमकदार बन जाता है lवैसे ही समस्याओं और संकटों से निकलकर मनुष्य अधिक मजबूत, धैर्यवान और विवेक वन बन जाता हैl उसका व्यक्तित्व निखार उठता हैl शिक्षा मानव जीवन निर्माण में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है मनुष्य की समस्त सिद्धियों और सफलताओं के लिए मनुष्य का शिक्षित होना परम आवश्यक है lपरंतु शिक्षक का अर्थ अक्षर ज्ञान प्राप्त करना पढ़ना लिखना सीख लेना मात्र नहीं है l

शिक्षा के जरिए विद्यार्थी में जिज्ञासा चिंतन शक्ति और तर्क शक्ति का विकास होना चाहिए और सबसे जरूरी है उसमें पैसा कमाने की क्षमता भी होनी चाहिए lजो सुख पूर्वक जीवन यापन के लिए आवश्यक है lमानव जीवन के सामाजिक और आध्यात्मिक पक्षों को उन्नत करने के लिए उसमें उत्तम चरित्र का विकास होना परम आवश्यक हैl उत्तम चरित्र का निर्माण सच्चाई सदाचार संयम अहिंसा करुणा मानवीय गुणों और मधुर व्यवहार एवं उज्जवल सकारात्मक विचारों से होता हैl

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