चरित्र व्यक्ति को आदरणीय बनाता है बिना चरित्र के तो शिक्षा भी श्रीहीन रहती हैl रावण जैसा विद्वान और शास्त्रों का प्रकांड पंडित भी चरित्र के अभाव में कभी सम्मान नहीं पा सकाl शिक्षित और चरित्रवान व्यक्ति स्वयं आगे बढ़ते हैं और दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं वास्तव में शिक्षा और चरित्र के संगम से ही मानव जीवन का निर्माण पूर्ण होता हैl शिक्षा के महत्व को और अधिक गहराई से समझे बिना शिक्षक के व्यक्तिगत मंडूक बना रहता हैl उसकी जानकारियां बहुत सीमित होती है और दैनिक जीवन में उसे अनेक व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैl ज्ञान के अभाव में अनेक अंधविश्वास उसके जीवन को कष्ट में बनाते हैं lवास्तव में अनपढ़ व्यक्ति का जीवन पशु तुल्य ही होता है l
कहा भी गया है"विद्याविहीन नर पशु समाना"
शिक्षा से व्यक्ति के ज्ञान का अंधकार मरता है शिक्षा मनुष्य के जीवन का निर्माण करती है lउसकी सफलता में अनेक मार्ग खोलती हैl उसे सुसंस्कृत और सभ्य बनाती हैl एडिशन ने कहा मनुष्य के लिए ऐसी इच्छा है जैसी संगमरमर की मूर्ति कलाl शिक्षा मनुष्य के विवेक को जागृत और विकसित कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनाती हैl शिक्षा से मनुष्य के मानसिक और सामाजिक ज्ञान विकसित होता हैl शिक्षित होकर हम अपने इतिहास साहित्य और संस्कृति को जान पाते हैं l
और सारे विश्व के ज्ञान विज्ञान के समाचार घटनाएं और अन्य जानकारियां हमें मिलती हैl हमारे शास्त्रों में विद्या को श्रेष्ठ कहा गया हैl विद्या धनम् श्रेष्ठ धनम नांमुलमित्र्म रतन दानेन वर्धते नित्यं भारं न नीयतेl अर्थात विद्याधन ही श्रेष्ठ धर्म जितने भी यही है या दान करने से बढ़ता है ना इसमें कोई भार है और ना इसमें कोई चुरा सकता हैl विद्या तो कल्पतरु के समान हैl देखिए विद्या के कैसे सुख और उपलब्धि होती हैl
विद्या ददाति विनियम, विनयम आयति पात्रताl पत्रत्वात धानमत्प्रिति धनात धर्म ,तदसुखमll विद्या विनय विनय से पात्रता योग्यता आती है पात्रता से धन की प्राप्ति और धन से धर्म की उपलब्ध होती है सुख होता हैl