भारतीय संविधान Easy Notes - 21 (भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं)

​क्रमशः..

Day - 21

  • विधान सभा चुनावों के साथ ही पांच प्रान्तों बम्बई, मद्रास, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के लिए भी चुनाव सम्पन्न कराये गये। उन चुनावों में कांग्रेस को आंशिक सफलता प्राप्त हुई।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 देश की स्वतंत्रता से पूर्व 14 अगस्त, 1947 तक अस्तित्व में रहा।
  • कांग्रेस द्वारा संविधान सभाके गठन की मांग निरन्तर की जाती रही, किन्तु ब्रिटिश सरकार द्वारा इसकी उपेक्षा की जाती थी परन्तु द्वितीय विश्व युध्द (1939-45) की आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय दबावों के कारण ब्रिटिश सरकार इस बात पर सहमत हो गई कि भारतीयों द्वारा भरतीय संविधान का निर्माण अपेक्षित है।
  • 1942 में ब्रिटिश सरकार ने ‘क्रिप्स मिशन’ के माध्यम से यह स्वीकार किया कि भारत में निर्वाचित संविधान सभा का गठन किया जाएगा और इस प्रकार गठित संविधान सभा ही भारतीय संविधान का निर्माण करेगी। क्रिप्स मिशन में इसके अतिरिक्त अन्य व्यवस्थायें भी की गई थीं, जिन्हें भारतीयों द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया और इस कारण क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव को लागू नहीं किया जा सका।
  • 1945 में द्वितीय विश्व युध्द की समाप्ति के बाद मार्च, 1946 में ब्रिटेन के नये प्रधानमन्त्री ‘क्लेअमेंट एटली’ ने ब्रिटिश मंत्रिमण्डल के तीन सदस्यों (लार्ड पैथिक लारेंस, सर स्टैफर्ड क्रिप्स तथा ए.बी. एलेक्जेण्डर) को भारत भेजा, जिसे ‘कैबिनेट मिशन’ कहा गया।
  • कैबिनेट मिशन के अध्यक्ष ‘लार्ड पैथिक लारेंस’ ने 16 जून, 1946 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस मिशन ने अपनी रिपोर्ट में दो प्रकार का प्रस्ताव किया-
  1. भारतीय राज्य तथा प्रशासन के सम्बन्ध में प्रस्ताव
  2. संविधान सभा के गठन के सम्बन्ध में प्रस्ताव
  • कैबिनेट मिशन ने भारतीय राज्य तथा प्रशासन के सम्बन्ध में अपने प्रतिवेदन में कहा कि ब्रिटिश भारत तथा भारतीय राज्यों को मिलाकर एक संघ (यूनियन) का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास राष्ट्रीय सुरक्षा, परिवाहन और विदेशी मामलों सम्बन्धी प्रशासन का अधिकार हो। संघ में निहित विषयों के अतिरिक्त अन्य विषयों पर प्रान्तों का अधिकार होना चाहिए। भारत पर ब्रिटिश सरकार की प्रभुत्व सम्पन्नता को समाप्त कर देना चाहिए तथा भारतीय रियासतों को इस बात की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे संघ में अपने को शामिल करें या नहीं।
  • कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा के गठन के संबंध में अपने प्रतिवेदन में कहा कि संविधान सभा में प्रत्येक प्रानन्त द्वारा भेजे जाने वाले सदस्यों की संख्या का निर्धारण प्रान्त की जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा और 10 लाख जनसंख्या पर एक सदस्य निर्वाचित किया जाएगा। प्रान्तो को आवंटित स्थानों को, इनमें निवास करने वाली प्रमुख जातियों में, उनकी संख्या के आधार पर विभाजित कर दिया जाएगा। विभाजन साधारण, मुसलमान तथा सिख (केवल पंजाब) के लिए किया जाएगा। देशी रियासत के सदस्य भी संविधान सभा में एक प्रतिनिधि होंगे।

जारी..

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