1962 ईसवी में इंटरनेशनल यूनियन कन्वर्सेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेस के अंतर्गत विश्व वन्यजीव कोष का गठन किया गया जिसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड में है।
उद्देश्य-
इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं -
1. लूुप्त प्राणियों का संरक्षण एवं संरक्षण संबंधी परियोजनाओं के लिए विश्वव्यापी प्रोत्साहन।
2. संरक्षण कार्यों का विस्तार।
3. संरक्षण संबंधित शिक्षा एवं प्रशिक्षण का प्रसार तथा इसके लिए वन्यजीव प्रबंधन हेतु शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना।
सन 1966 में ICUN ने एक रेड डाटा बुक नामक किताब का प्रकाशन किया जिसमें विलुप्त प्राय व्यक्तियों की सूची एवं उनके बचाव के उपाय बताए गए हैं। इसके अंतर्गत नए संस्करण सभी छपते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण हेतूु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रथम महत्वपूर्ण प्रयास 1972 ई. में स्वीडन सम्मेलन 'हमारी एकमात्र पृथ्वी' का नारा दिया गया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का गठन हुआ। इसका कार्यालय नैरोबी (केन्या) में है ।
1977 ईस्वी में UNPSCD द्वारा मानव मंगल कार्यक्रम (MAB) जिसके अंतर्गत विभिन्न देशों में जो अभ्यारण स्थापित किए गए हैं।
1987 ई. में मॉन्ट्रियल समझौता कनाडा में क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उत्पादन तथा उपयोग की मात्रा को सीमित करने का संकल्प किया गया।
लंदन संधि अथवा लंदन प्रोटोकोल के अंतर्गत सीएफसी के उत्पादन को बंद करने का निर्णय लिया गया।
जून 1992 में पृथ्वी शिखर सम्मेलन रियो-डी जेनेरो में जैव विविधता के संरक्षण पर जोर दिया गया।
सन 1997 में पृथ्वी शिखर सम्मेलन न्यूयॉर्क में ग्रीन हाउस प्रभाव तथा ओजोन छिद्र पर चर्चा हुई।
दिसंबर 1997 में क्योटो सम्मेलन जापान में पृथ्वी की ताप वृद्धि से पृथ्वी को बचाने के उपाय का सम्मेलन तथा ग्रीन हाउस की कटौती पर सम्मेलन हुआ जिसे क्योटो प्रोटोकोल कहते हैं।