महिलाओं पर बढ़ते अपराधों के लिए हमारे सामाजिक परिवेश चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण बराबर उत्तरदाई हैं lशहरों में तो हर आयु वर्ग को एक क्लिक पर पॉर्नोग्राफी उपलब्ध हो जाती हैl हमारे देश में हुई डिश एंटीना की क्रांति से देश के गांव भी अछूते नहीं हैं lसमाचार चैनलों पर समाचार के नाम पर यौन शोषण के जो समाचार परोसे जाते हैं lकुछ कार्यक्रम अपराधियों के प्रति जागरूकता फैलाने का दावा करते हैं लेकिन वह भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं पर अपराधों को बढ़ावा देते हैंl
महिलाओं पर अपराधों का कारण विकृत मानसिकता है lमहिलाओं के प्रति अपराधों के लिए उनके परिधान, मोबाइल, शिक्षा को जिम्मेदार माना जाता हैl अक्सर तर्क दिया जाता है कि महिलाएं जींस पहनती हैंl टाइट कपड़े पहनती हैंl तो लड़के उत्तेजित होते हैं और उन्हें छेड़ते हैं प्रश्न है कि फिर एक दूधमुही बच्ची और 60 वर्ष के बुजुर्ग महिला का बलात्कार क्यों होता है? क्यों साड़ी पहनने वाली महिला और बुर्का पहनने वाली महिला का बलात्कार होता है? असल में ऐसे व्यक्तियों से महिलाओं की स्वतंत्रता के हनन करने का प्रयास किया जाता है lजब हमारी अपनी बेटियां पश्चात परिधान धारण करती हैं तो क्या उसे देखकर भी पिता या भाई उत्तेजित होते हैं? अधिकांश का उत्तर होगा नहीं lतो यहां भी प्रश्न मानसिकता का ही है यहां पारिवारिक बंधन या सामाजिक मर्यादाओं विकृत मनोविकास स्पीड ब्रेकर बन जाती हैं lयदि ऐसे स्पीडब्रेकर हम सभी की मानसिकता पर हो तो महिलाओं पर अपराधों में स्वतः ही कमी आ जाएगीl