मनुष्य की श्रव्यता सीमा (Audibility Range of Human Being)
मनुष्य 20Hz से 20,000Hz के बीच आवृत्ति वाली ध्वनियों को सुन सकता है। इस आवृत्ति परिसर (Frequency Range) को मनुष्य की श्रव्यता सीमा कहते हैं।
अवश्रव्य तरंग (Infrasonic Waves)
20Hz के नीचे की ध्वनि तरंग।
मनुष्य की धड़कने तथा भूकम्प की तरंगें अवश्रव्य तरंगें होती हैं।
हाथी, ह्वेल तथा डालफिन इन तरंगों को निकाल सकते हैं।
कुत्ते, लोमड़ी एवं हिरन इन तरंगों को सुनने की क्षमता रखते हैं।
पराश्रव्य तरंग (Ultrasonic Waves)
20,000Hz के ऊपर की तरंगों को पराश्रव्य तरंग कहते है।
चमगादड़ एवं कुत्ते इस तरंग को निकालने एवं सुनने की क्षमता रखते हैं।
इन तरंगों को गाल्टन की सीटी के द्वारा तथा दाब वैद्युत प्रभाव की विधि द्वारा क्वाटर््ज के क्रिस्टलों के कम्पनों से उत्पन्न करते हैं।
विद्युत चुम्बकीय तरंगे (Electro-Magnetic Waves)
संचरण के लिए माध्यम आवश्यक नहीं।
निर्वात में इसका वेग प्रकाश के वेग (3×108m/s) के बराबर होता है।
विद्युत या चुम्बकीय क्षेत्र का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
इन किरणों में काॅस्मिक किरणें, गामा किरणें, एक्स किरणें, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी किरणें, अवरक्त किरणें तथा रेडियो तरंगे शामिल है।