पराबैंगनी किरणें (Ultra - Violet rays) अवरक्त किरणें (Infra - red rays) लघु रेडियो तरंगे (Micro-waves)

पराबैंगनी किरणें (Ultra - Violet rays)

      इन किरणों की खोज रिटर ने 1801 ई0 में किया।

      सूर्य तथा कोई भी 25000c से ऊपर के तापमान वाले पिण्ड इसके स्रोत होते हैं।

      सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों का अधिकांश भाग ओजोन स्तर (Ozone Layer) के द्वारा अवशोषित किया जाता है।

      कम आवृत्ति की पराबैंगनी किरणें जीवों के शरीर में विटामिन-डी पैदा करती हैं।

      इसका उपयोग जल की कीटाणुनाशी बनाने, घी की शुद्धता जाँचने, जाली करेंसी नोट की जाँच करने, इत्यादि में किया जाता है।

      प्रतिदीप्त नली (Fluroscent tube) में पराबैंगनी किरणें फाॅस्कर से टकराकर दृश्य प्रकाश उत्पन्न करती है।

अवरक्त किरणें (Infra - red rays)  

      इन किरणों की खोज विलियम हार्सेल ने 1801 ई0 में किया।

      इन किरणों को ऊष्मीय किरणें (Thermal rays) भी कहते हैं, क्योंकि यही पदार्थों में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।

      इन किरणों की प्राप्ति सौर-विकिरण या किसी भी तप्त पदार्थ से होती है।

      इनका उपयोग रात में देखने वाले दूरबीन, क्रूज प्रक्षेपास्त्रों के सेंसर तथा टेलीविजन के रिमोट में किया जाता है।

लघु रेडियो तरंगे (Micro-waves)

      इन किरणों की खोज हेनरिक हट्र्ज ने 1888 ई0 में किया।

      ये भी सूर्य के प्रकाश में पायी जाती है।

      इनका उपयोग रडार (Radar), रेडियो एवं टेलीविजन में किया जाता है।
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