समतल दर्पण के उपयोग-
i श्रृंगार दर्पण (Dressing Mirror) के रूप में।
iii पनडुब्बियों के बाहर की वस्तु को देखने के लिए परिदर्शी (Periscope) के रूप में।
iii बहुदर्शी में।
गोलीय दर्पण (Spherical Mirror)
यह दर्पण किसी खोखले शीशे के गोले का भाग होता है।
गोलीय दर्पण में किसी वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति वस्तु का दर्पण से दूरी पर निर्भर करता है।
इसे अवतल (Concave) तथा उत्तल (Convex) दर्पण में विभाजित किया जाता है।
इस दर्पण का एक तल उभरा तथा एक तल धँसा होता है। यदि उभरे भाग की कलई की जाती है तो उसे अवतल दर्पण तथा धँसे भाग की कलई करने पर उत्तल दर्पण कहते हैं।
अवतल दर्पण (Concave Mirror)
यदि वस्तु का प्रतिबिम्ब कभी उल्टा व छोटा, कभी उल्टा व बड़ा तथा वस्तु को दर्पण के काफी पास लाने पर सीधा और वस्तु से बड़ा बने तो यह अवतल दर्पण होता है।
इसमें उभरे भाग की कलई की जाती है।
इस दर्पण के ध्रुव और फोकस के बीच रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब काल्पनिक, वस्तु के सापेक्ष सीधा तथा बड़ा बनता है।
उपयोग-
शेविंग मिरर के रूप में (चेहरे को फोकस एवं धु्रव के बीच में रखा जाता है)
सर्चलाइट तथा गाड़ियों के हेडलाइट में।
आँख, कान एवं गला के डाॅक्टर के द्वारा प्रयुक्त उपकरण में।
सोलर कुकर के परावर्तन में।